ठोस अवस्था इलेक्ट्रॉनिकी - हरि प्रकाश सिन्हा Thos Awastha Electroniki - Hindi book by - Hari Praksha Sinha
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ठोस अवस्था इलेक्ट्रॉनिकी

डॉ. हरि प्रकाश सिन्हा

राजेश कुमार वर्मा

प्रकाशक : राम प्रसाद पब्लिकेशन्स प्रकाशित वर्ष : 2018
पृष्ठ :216
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 2510
आईएसबीएन :9789385644207

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यू० पी० यूनिफाइड पाठ्यक्रमानुसार बी.एस.सी. भौतिक विज्ञान प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों के लिए पाठ्य पुस्तक

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विषय-सूची

ठोस अवस्था इलेक्ट्रॉनिकी

1. अर्द्ध-चालक तथा अर्द्ध-चालक डायोड...1-42
(SEMICONDUCTORS AND SEMICONDUCTOR DIODES)
प्रस्तावना: ठोस पदार्थों में ऊर्जा बैंड: चालन के प्रति बैंड का व्यवहार; ऊर्जा बैंड के आधार पर धातु, कुचालक एवं अर्द्ध-चालक में अन्तर: इलेक्ट्रॉनों द्वारा चालन: विवर या (ल की अवधारणा; आन्तर या शुद्ध अर्द्ध-चालक अशुद्धियुक्त बाह्य अर्द्ध-चालक: बहुसंख्यक तथा अल्पसंख्यक आवेश वाहक; दाता तथा ग्राही स्तर; अर्द्ध-चालक में अल्पसंख्यक आवेश वाहकों का विसरण: धातुओं एवं अर्द्ध-चालकों में कार्यफलन; धातु अर्द्ध-चालक एवं अर्द्ध-चालक-अद्ध-चालक सम्पर्क बिन्दु:P.N सन्धि, अशद्धि सांद्रता का अकस्मात् असांतत्य:PAN सन्धि डायोड; PAN सन्धि की अभिनति; P-N सन्धि डायोड का अभिलक्षण वक्र विभव प्राचीर अथवा रोधिका विभव; अवक्षय पर्त की चौड़ाई:सन्धि की धारिता; सन्धि डायोड में पश्च वोल्टता भंजन: जेनर डायोड: टनल डायोड; अनुप्रयोग; बिन्दु सम्पर्क डायोड; प्रकाश उत्सर्जक डायोड/लाइट इमिटिंग डायोड: LED से प्राप्त प्रकाश; LED की रचना; LED का विद्युत् परिपथ: LED के लाभ या उपयोगितायें: LED की कमियाँ; LED के उपयोग: LED के आकार एवं आकृति एवं LED के प्रदर्श; फोटो डायोड; संधि डायोड पर ताप का प्रभाव थर्मिस्टर; ताप-प्रतिरोध वक्र।
2. ट्रांजिस्टर...43-79
(TRANSISTORS)
ट्रांजिस्टर; द्वि-ध्रुवी सन्धि ट्राजिस्टर: P-N-Pट्रांजिस्टर की कार्यविधि: N-P-N ट्रांजिस्टर की कार्यविधि: आधार-चौड़ाई मॉडलनः अल्पसंख्यक आवेश वाहकों का जीवन काल तथा गमन काल: संक्रमण तथा विसरण धारिता; इबर्स-मोल मॉडल तथा आधार विस्तारी प्रतिरोध; ट्रांजिस्टर उपयोग की विभिन्न विधाएँ तथा उनके अभिलाक्षणिक वक्र उभयनिष्ठ आधार विधा में अभिलाक्षणिक वक्र: उभयनिष्ठ उत्सर्जक विधा में अभिलाक्षणिक वक्र: उभयनिष्ठ संग्राही विधा में अभिलाक्षणिक वक्र: धारा प्रवर्धन गुणांक विभिन्न धारा लाभों में सम्बन्ध; वोल्टता लाभ: विभिन्न विधाओं में टांजिस्टर के गुणों की तुलना: ट्रांजिस्टर धाराओं के बीच सम्बन्ध B-नियम या पुनर्निवेशी नियम: T-समतुल्य परिपथ: टांजिस्टर प्राचल/पैरामीटर;Y-प्राचल;-h प्राचल: h - तथा y - प्राचलों के बीच सम्बन्ध; उत्क्रम सम्बन्ध।
3. ट्रांजिस्टर अभिनति...80-96
(TRANSISTOR BIASING)
ट्रांजिस्टर अभिनति: CE ट्रांजिस्टर का ग्राफीय विश्लेषण भार रेखा: ट्रांजिस्टर अभिनति की विभिन्न विधियाँ; स्थिर धारा अभिनति: संग्राहक-आधार प्रतिरोध; एमीटर-प्रतिरोध अभिनति: स्व अथवा विभाजक अभिनति; तापीय रन-अवे; अभिनति स्थायित्व व्यवस्था; स्थिर अभिनति; संग्राहक-आधार प्रतिरोध अभिनति; उत्सर्जक-प्रतिरोध अभिनति विभव विभाजक या स्व-अभिनति।
4. ट्रांजिस्टर प्रवर्धक....97-158
(TRANSISTOR AMPLIFIERS)
प्रवर्धक; प्रवर्धकों का वर्गीकरण; प्रवर्धक का सिद्धान्त: प्रवर्धकों के प्राचल: ट्रांजिस्टर प्रवर्धक का प्राचल सामान्य विश्लेषण उभयनिष्ठ आधार ट्रांजिस्टर प्रवर्धक; उभयनिष्ठ उत्सर्जक ट्रांजिस्टर प्रवर्धक, उभयनिष्ठ संग्राहक ट्रांजिस्टर प्रवर्धक, उत्सर्जक . अनुगामी: CB प्रवर्धक का । प्राचल विश्लेषण: CE-प्रवर्धक का -प्राचल विश्लेषण; Cc-प्रवर्धक का -प्राचल विश्लेषणः एकल स्टेज CB.CE तथा ccट्रांजिस्टर प्रवर्धकों का तुलनात्मक अध्ययन प्रवर्धकों में विरूपण: एक-स्टेजी RC- युग्मित CE ट्रांजिस्टर प्रवर्धक आवृत्ति अनुक्रिया वक्र विभिन अवयवों का वोल्टता लाभ पर प्रभाव: RC-युग्मित प्रवर्धन के लाभ तथा कमियाँ द्वि-स्टेजी प्रतिरोध-धारिता युग्मित ट्रांजिस्टर प्रवर्धक; डी.सी. बायसित ट्रांजिस्टर में ए.सी. स्त्रोत का लगना; लघु सिग्नल उभयनिष्ठ उत्सर्जक प्रवर्धक; डी.सी. तथा ए.सी. समतुल्य परिपथों की आवश्यकता; डी.सी. तथा ए.सी. समतुल्य परिपथों को प्राप्त करना; डी.सी. समतुल्य परिपथ में ट्रांजिस्टर; ए.सी. समतुल्य परिपथ में ट्रांजिस्टर: CB प्रवर्धक तथा उसके समतुल्य परिपथ CE प्रवर्धक तथा उसके समतुल्य परिपथ; ए.सो. समतुल्य परिपथ का विश्लेषण; CCप्रवर्धक तथा उसके समतुल्य परिपथ ट्रांजिस्टर शक्ति प्रवर्धक वोल्टेज प्रवर्धक एवं शक्ति प्रवर्धक में अन्तर: वोल्टेज प्रवर्धक तथा शक्ति प्रवर्धक की तुलना; वर्ग A तथा वर्ग B शक्ति प्रवर्धक: ट्रांजिस्टर शक्ति प्रवर्धक; वर्ग B दशा में कार्यविधि; शक्ति प्रवर्धक पर ताप का प्रभाव: प्रवर्धकों में विरूपण; प्रवर्धकों में स्टेजों का सोपानीकरण तथा बहुस्टेजी ट्रांजिस्टर प्रवर्धक; आवृत्ति अनुक्रिया वक्र या प्रवर्धक की बैण्ड चौड़ाई पर सोपानीकरण का प्रभाव प्रवर्धकों में पुनर्निवेश अथवा पुनर्निवेशी प्रवर्धक: पुनर्निवेश का सिद्धान्त; प्रवर्धकों में ऋणात्मक पुनर्निवेश के लाभ: वेल्टेज पुनर्निवेश तथा धारा पुनर्निवेश; ऋणात्मक पुनर्निवेश के प्रभाव।
5. क्षेत्र प्रभाव ट्रांजिस्टर...59-184
(FIELDEFFECT TRANSISTOR]
क्षेत्र प्रभाव ट्रांजिस्टर; संधि क्षेत्र प्रभाव ट्रांजिस्टर:Nचैनल JFET:P चैनल JFET; JFET का प्रचालन: JFET के अभिलाक्षणिक (धारा-वोल्टेज) वक्र; JFET के अभिलाक्षणिक नियतांक तथा उनमें सम्बन्ध : JEET के द्विध्रुवीय ट्रांजिस्टर में अन्तर: JFET से लाभ: JFET अभिनति: JFET के प्राचलन की विभिन्न विधाएँ: JFET का प्रवर्धक के रूप में उपयोग; धातु ऑक्साइड अर्द्धचालक क्षेत्र प्रभाव ट्रांजिस्टर; MOSFET के अभिलाक्षणिक वक्र; MOSFET के लाभ: MOSFET बायसिंग-वोल्टेज बायसिंग; परिवर्ती वोल्टेज प्रतिरोध के रूप में MOSFET का उपयोग।
6. अन्य अर्द्धचालक युक्तियाँ एवं परिपथ....185-205
(OTHER SEMICONDUCTOR DEVICES AND CIRCUITS)
पावर सप्लाई या शक्ति संभरण; नियमित पावर सप्लाई के प्रमुख भाग; नियमित पावर सप्लाई की कायविधि; वोल्टता नियमन ऊर्मिका गुणांक; वोल्टता गुणक: अर्द्ध-तरंग वोल्टता द्विगुणक; पूर्ण-तरंग वोल्टता दिगणक: व्यापक वोल्टता गुणक: प्रतिलोमित्र या इन्वर्टर एकीकृत या संकुलित परिपथ: c के लाभ: ICs की कमियों या सीमायें: एकीकरण का स्तर: ICs का वर्गीकरण: रैखिक एकीकृत परिपथ रैखिक ICs के उपयोग; डिजिटल एकीकृत परिपथ: 10 संविरचण: फोटोलिथोग्राफी प्रक्रिया: फोटो ट्रांजिस्टर, सिलिकॉन नियन्त्रित दिष्टकारी अभिलाक्षणिक वक्र: एकल सन्धि ट्रांजिस्टर:UT विश्रान्ति दोलित्र।
लघुगणक एवं प्रतिलघुगणक सारणियाँ...i-iv 

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