Prachin Bharat Ka Itihas
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प्राचीन भारत का इतिहास

प्रो. द्विजेन्द्र नारायण झा

प्रो. कृष्ण मोहन श्रीमाली

प्रकाशक : दिल्ली विश्वविद्यालय प्रकाशित वर्ष : 2017
पृष्ठ :512
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 2535
आईएसबीएन :9789380172194

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प्राचीन भारत का इतिहास

प्राचीन भारत का इतिहास पर विभिन्न विद्वानों के अभिमत

विषय-सूची

अध्याय 1. भारतीय इतिहास की भौगोलिक पृष्ठभूमि ... 1

दिलीप कुमार चक्रवर्ती
इतिहास विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय

इतिहास के अध्ययन का भौगोलिक दृष्टिकोण 1, भारत की भूआकृति तथा उसके प्राकृतिक क्षेत्र 2, प्रमुख संचार-मार्ग 7, सांस्कृतिक एवं आर्थिक विविधता 10. मानव प्ररूप 11
अध्याय 2. प्राचीन भारतीय इतिहास के स्रोत ... 12

ओम प्रकाश (सेवानिवृत्त)
किरोड़ीमल कॉलेज

पुरातात्त्विक स्रोत 13,  अभिलेख 14,  सिक्के 16,  स्मारक और भवन 17,  मूर्तियाँ 18,  चित्रकला 18,  अवशेष 18,  साहित्यिक स्रोत 20,  बौद्ध साहित्य 23,  जैन साहित्य 23,  धर्मेतर भारतीय साहित्य 24,  विदेशियों के वृत्तांत 27,  यूनान और रोम के लेखक 28,  अरज यात्रियों के वृत्तांत 29.
अध्याय 3. प्रागैतिहासिक पुरातत्व ... 30

दिव्येद् कांति भट्टाचार्य 
नृविज्ञान विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय

संस्कृति 32.  प्रागैतिहासिक अध्ययनों का महत्त्व 35,  प्रागैतिहासिक पंचांग 37.  उपकरण-प्ररूप 39,  मानव विकास 45,  भारत में मानव-विकास की समस्या 51,  परापाषाणकालीन भारत 54,  भारत का अत्यंतनूतन युग 54,  पूर्व-पुरापाषाण काल 58.  मध्य-पुरापाषाण काल 60,  उत्तर-पुरापाषाण 62,  क्षेत्रीय स्वरूप 64,  मध्यपाषाणकालीन भारत 65,  वातावरण और विन्यास 65.  संस्कृति और वितरण 67.
अध्याय 4. आद्य इतिहास ... 75

दिलीप कुमार चक्रवर्ती
इतिहास विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय

आद्य इतिहास का अर्थ 75, भारतीय इतिहास में आद्य ऐतिहासिक काल का महत्व 76, आद्य ऐतिहासिक अनुसंधान की पद्धतियाँ 77, भारत में खाद्य उत्पादन या नवपाषाण अर्थव्यवस्था का आरंभ 80, बलूचिस्तान और बृहत्तर सिंधु घाटी की आरंभिक बस्तियाँ 84, सिंधु सभ्यता : विविध पक्ष और समस्याएँ 88, सिंधु सभ्यता का भौगोलिक विस्तार और प्रमुख बस्तियों के नाम 89, सिंधु सभ्यता की नगर योजना 91, कृषि 95, प्रौद्योगिकी 96, लिपि 96, कला और धर्म 96, व्यापार 98, सामाजिक संगठन 98, सिंधु घाटी के लोगों की शारीरिक विशेषताएँ 98. हडप्पायुगोत्तर तथा भीतरी भारत की अन्य संस्कृतियाँ 101, ऊपरी गंगा घाटी और गंगा-यमुना दोआब 109, लौहप्रयोक्ता संस्कृतियाँ 110, चित्रित धूसर भांड संस्कृति 110, मध्य भारत (मालवा) की लौह-प्रयोक्ता संस्कृति 112. मध्य निम्नगंगा घाटी (पूर्वी भारत) की लौह-प्रयोक्ता संस्कृतियाँ 113. प्रौद्योगिकी 114, भारतीय संदर्भ में लोहे का उद्गम 114.
अध्याय 5. वैदिक साहित्य में प्रतिबिंबित भारत ... 115

कृष्ण मोहन श्रीमाली
इतिहास विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय

वैदिक साहित्य क्या है? 115, वैदिक साहित्य के रचयिता कौन है? 116, वैदिक साहित्य का रचनाकाल 117, वैदिक साहित्य की भौगोलिक पृष्ठभूमि 119, वैदिक साहित्य एवं पुरातात्त्विक साक्ष्य 120, वैदिक साहित्य में प्रतिबिंबित भारत 122, ऋग्वैदिक काल (ईसा पूर्व लगभग 1500-1000) 122, उत्तर वैदिक काल (ईसा पूर्व लगभग 1000-500) 130.
अध्याय 6. ईसा पूर्व छठी शताब्दी में भारत में धार्मिक आंदोलन का स्वरूप ... 140

गोविंद प्रसाद उपाध्याय
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय

नवीन धार्मिक आंदोलनों का स्वरूप 143, नवीन बौद्धिक आंदोलन तथा उनका वैदिक धर्म पर प्रहार 144, वैदिक धर्म तथा सामाजिक व्यवस्था का विरोध 145, जैन धर्म 147, महावीर स्वामी 148, जैन धर्म के सिद्धांत 149, पार्श्वनाथ तथा महावीर की शिक्षाओं में अंतर 150, जैन दर्शन 151, जैन संघ 152, बौद्ध धर्म 152, महात्मा बुद्ध की जीवनी 152, बौद्ध धर्म की शिक्षाएँ तथा सिद्धांत 155, संघ 157, संघ की कार्य-प्रणाली 158. बौद्ध धर्म की लोकप्रियता के कारण 159.
अध्याय 7. महाजनपदों का उदय और फ़ारस एवं यूनान के आक्रमण ... 162

उर्मिला भागोवालिया
इंद्रप्रस्थ कॉलेज

मगध का उत्थान 170. ईरानी आक्रमण 172, ईरानी आक्रमण का प्रभाव 172, सिकंदर का यूनानी आक्रमण 173, सिकंदर के आक्रमण के प्रभाव 174
अध्याय 8. मौर्यकाल ... 176

हरि शंकर कोटियाल
हिंदू कॉलेज

चंद्र गुप्त मौर्य 176, बिंदुसार 180, अशोक 181, अशोक का धर्म परिवर्तन 184, अशोक का धम्म 184, अशोक शासक के रूप में 191, मौर्य साम्राज्य के पतन के कारण 194, मौर्यकालीन भारत 198, मौर्यकालीन समाज 199, आर्थिक व्यवस्था 201, व्यापार 205, दास प्रथा 208. शासन प्रबंध 211. धर्म 218, मौर्यकालीन कला 219, राजकीय कला 220, लोक कला 222.
अध्याय 9. मौर्योत्तर काल ... 224

लक्ष्मी श्रीवास्तव
इंद्रप्रस्थ कॉलेज

ऐतिहासिक स्रोत 224, विदेशी आक्रमण: बैक्ट्रिया के ग्रीक 225, यूनानी संपर्क का भारत पर प्रभाव 227. हिंदपार्थियन 229, शक 229, कुषाण 231, कनिष्क 231, शुंगवंश 233, काण्व वंश 234, दक्कन में मौर्योत्तर राज्य 235, आंध्रसातवाहन वंश 235, वाकाटक 237, राज्यव्यवस्था एवं प्रशासन 238, व्यापार एवं नगर 239, आर्थिक व्यवस्था और सिक्के 241, समाज और धर्म 243, महायान बौद्ध धर्म का उदय 245, जैन धर्म 246, कला 246, चित्रकला 247, मौर्योनर कालीन साहित्य 248.
अध्याय 10. सुदूर दक्षिण में प्रारंभिक इतिहास की रूपरेखा ... 249

गोविंद प्रसाद उपाध्याय
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय

भौगोलिक पृष्ठभूमि 249, संगम साहित्य: सुदूर दक्षिण के आरंभिक इतिहास का मुख्य स्रोत 250, पदिटुप्पत्तु, परिपाड़ल कलित्तोहई, अहनानुरु और पुरनानूरु 250, दक्षिण भारत का आरंभिक इतिहास 252, आवास-स्थल 252, शवाधान केंद्र (क़ब्रगाह) 252, महापाषाण स्मारकों का वर्गीकरण 253, महापाषाण संस्कृति का काल-निर्धारण 254, महापाषाण कालीन जीवन 255, राज्यों का उदय 256, चोल 259, पांड्य 260, सामाजिक स्थिति 265, आर्थिक जीवन 267, ब्राह्मण धर्म का आरंभ तथा विकास 270, बौद्ध धर्म का प्रसार 273, जैन धर्म का प्रसार 274.
अध्याय 11. उत्तरी भारत का इतिहास 300-650 ई. गजनीतिक एवं आर्थिक स्थिति ... 277

आत्रेयी विश्वास
सत्यवती कॉलेज

गजनीतिक इतिहास 277. गप्तों की उत्पत्ति 278, प्रारंभिक शासक 278, चंद्र गुप्त • प्रथम 279, समद्र गुप्त 279, चंद्र गुप्त द्वितीय 282. गोविंद गप्त तथा कुमार गुप्त प्रथम 284, स्कंद गुप्त 285, परवर्ती गुप्त शासक और गुप्त वंश के पतन का प्रारंभ 286, हणों का आक्रमण 286, हर्ष वर्धन का उदय 287, शासन प्रबंध और आर्थिक व्यवस्था 289.
अध्याय 12. उत्तरी भारत का इतिहास, 300-650 ई. (सामाजिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थिति) ... 303

मीनाक्षी सहाय
माता सुंदरी कॉलेज

सामाजिक स्थिति 303, अस्पृश्यता 311, दास प्रथा 312, स्त्रियों की दशा 315, धार्मिक विकास 318, हिंदू धर्म 318, वैष्णव धर्म 318, शैव धर्म 320. सूर्यपूजा 322, बौद्ध धर्म 323, जैन-धर्म 324, कला और साहित्य 324, मूर्ति-कला 327, चित्रकला 328, साहित्य 330, विज्ञान तथा तकनीक 333, गुप्त युग का मूल्यांकन 334.
अध्याय 13. गुप्तोत्तर काल : राजनीतिक स्थिति ... 337

सरोज गुलाटी
लक्ष्मीबाई कॉलेज

दक्षिण भारत 337, चालुक्य वंश 338, पल्लव वंश 344, भारत पर अरबों के आक्रमण 349. सिंध पर अरबों के आक्रमण के कारण 351, राजपूतों की उत्पत्ति 354, गुर्जर प्रतीहार, राष्ट्रकूट एवं पाल वंश 361, त्रिपक्षीय संघर्ष 362, उत्तर एवं दक्षिणी भातर के अन्य क्षेत्रीय राज्य 368, उत्तरी भारत 368, चाहमान वंश 368, चंदल वंश 369, परमार वंश 370, दक्षिणी भारत 371, चोल वंश 371.
अध्याय 14. गुप्तोत्तर काल : सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक विकास ... 373

हरि शंकर कोटियाल
हिंदू कॉलेज

सामाजिक स्थिति 373, अंतर्जातीय विवाह 381, अस्पृश्यता 382, दासप्रथा 383, आर्थिक दशा 385, व्यापार 386, विदेशों के साथ व्यापार 388. समुद्री व्यापार 389, उद्योग 390, वस्त्र उद्योग 391, धातु उद्योग 391, श्रेणी संगठन 392, मुद्रा 393, सिक्कों के मान 394, सांस्कृतिक विकास 394, धर्म 395, वैष्णव मत 395, शैव धर्म 396, दक्षिण में शैव धर्म 398. शाक्त संप्रदाय 399. गणेश पूजा 400, सूर्य पूजा 400, तांत्रिक धर्म 401, बौद्ध धर्म 403. जैन धर्म 406, देश के सामाजिक धार्मिक तथा सांस्कृतिक जीवन में मंदिर का योगदान 407. शिक्षा 411, गुप्तोत्तरकालीन भारतीय कला 413, वास्तुकला 413, उड़ीसा 414, खुजराहो 415, राजस्थान 416, पश्चिमी भारत तथा गुजरात 417. दक्षिण 418, ऐलोरा 418, द्रविड़ शैली के मंदिर 420, चोलकालीन वास्तुकला 422, पांड्यकालीन वास्तुकला 424.
पारिभाषिक शब्दावली (हिंदी अंग्रेजी) ... 425
संदर्भ ग्रंथसूची ... 432
अनुक्रमणिका ... 440

विनामूल्य पूर्वावलोकन

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