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बी एड - एम एड >> बीएड सेमेस्टर-2 हिन्दी शिक्षण बीएड सेमेस्टर-2 हिन्दी शिक्षणसरल प्रश्नोत्तर समूह
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बीएड सेमेस्टर-2 हिन्दी शिक्षण - सरल प्रश्नोत्तर
अध्याय 9 - हिन्दी व्याकरण शिक्षण के उद्देश्य एवं उनकी विधियाँ
प्रश्न- व्याकरण का अर्थ बताइए एवं इसकी परिभाषा दीजिए। व्याकरण की विशेषताओं, आवश्यकताओं, उद्देश्यों एवं प्रकारों पर प्रकाश डालिये।
अथवा
व्याकरण शिक्षण के उद्देश्य बताइये। व्याकरण के प्रकार का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
अथवा
'व्याकरण भाषा का नियन्त्रक होता है।" उदाहरण सहित कथन की व्याख्या कीजिए।
सम्बन्धित लघु उत्तरीय प्रश्न
1. व्याकरण का अर्थ बताइये।
उत्तर-
व्याकरण का अर्थ एवं परिभाषा
व्याकरण भाषा का सिद्धान्त पक्ष होता है। कुछ विद्वान इसे भाषा की आत्मा भी कहते हैं। उनके कहने का आधार यह है कि - " भाषा की इकाई वाक्य, वाक्य की इकाई शब्द, और शब्द की इकाई अक्षर होते हैं। किसी भी भाषा को समझने के लिए अक्षरों, शब्दों और वाक्यों इन तीनों के स्वरूप को समझना होता है। ये ही व्याकरण के मूल तत्त्व होते हैं और उन्हें क्रमशः ध्वनि-विज्ञान, शब्द-विज्ञान और वाक्य-रचना कहा जाता है।"
महर्षि पाणिनी और पंतजलि के अनुसार- व्याकरण शब्दानुशासन है। इसमें भाषा का रूप व्यवस्थित होता है। पंतजलि ने भी अपने महाभाष्य में इसे ' शब्दानुशासन' कहा है। हेमचन्द्र के अनुसार- व्याकरण शब्दानुशासन नहीं है।
विद्वानों ने व्याकरण की परिभाषा विभिन्न रूपों में की है। यहाँ पर कुछ महत्त्वपूर्ण व्याकरण की परिभाषायें दी गई हैं-
लेनार्ड ह्यूम ग्रीलड के अनुसार- "भाषा के रूप की सार्थक एवं शुद्ध व्यवस्था ही व्याकरण है।" महर्षि पाणिनी और पतंजलि के मतानुसार- व्याकरण शब्दानुशासन है। इसमें भाषा का रूप व्यवस्थित होता है। महर्षि पतंजलि ने भी अपने महाकाव्य में इसे "शब्दानुशासन" कहा है। हेमुचन्द ने कहा है कि व्याकरण का काम है भाषा पर अनुशासन रखना। इस प्रकार हेमचन्द्र के मतानुसार व्याकरण शब्दानुशासन ही है।
डॉ. स्वीट के मतानुसार- "व्याकरण भाषा का व्यावहारिक विश्लेषण अथवा शरीर विज्ञान है।" व्याकरण शब्द वि + आ + कृ धातु + लरुह प्रत्यय का योगफल है जिसका तात्पर्य है व्याक्रियन्ते अर्थात् जिसके द्वारा अर्थ स्वरूप के माध्यम से शब्दों की व्याख्या होती है।
जैगर का मत है कि- "प्रचलित भाषा सम्बन्धी नियमों की व्याख्या ही व्याकरण है।" यह मत जैगर विद्यालयों में व्याकरण शिक्षा को ध्यान में रखते हुये व्यक्त किया था।
सानशिन के अनुसार- वाक्य में विभिन्न शब्दों के समूहों में क्या अन्तर है व्याकरण इसकी व्याख्या तथा अर्थ उत्पन्न करता है।"
"व्याकरण केवल वाक्य संरचना का वर्णन करता है। "व्याकरण शब्दों में प्रयोग का अनुशासक तथा नियन्त्रक है। इसलिए इसे "शब्दानुशासन" भी कहा जाता है। व्याकरण भाषा का अंगरक्षक है।
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