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संहित  : वि० [सं० सम्√धा (रखना)क्ति, धा=हि] १. एक स्थान पर जोड़ या मिलाकर रखा हुआ। एकत्र किया या बटोरा हुआ। २. मिलाया या सम्मिलित किया हुआ। ३. संबंद्ध। संश्लिष्ट। ४. अन्वित। युक्त। ५. अनुकूल। अनुरूप। ६. आजकल जो अधिकारियों के द्वारा नियमों विधियो आदि की संहिता के रूप में लाया गया हो। (कोडिफ़ायड)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
संहिता  : स्त्री० [सं०] १. सहिंत अर्थात एक में मिले हुए होने की अवस्था या भाव। मेल। संयोग। २. वह नया रूप जो बहुत सी नयी चीजें एकत्र करने या एक साथ रखने पर प्राप्त होता है। संकलन। संग्रह। ३. कोई ऐसा ग्रंथ जिसके पाठ आदि का क्रम परम्परा से किसी नियमित और निश्चित रूप से चला आ रहा हो। जैसे—अत्रि। (या मनु) की धर्म संहिता। ४. वेदों का वह मंत्र (ब्राह्मण नामक भाग से भिन्न) जिसके पद पाठ आदि का क्रम निश्चित है और जिसमें स्तोत्र आशीर्वादात्मक सूक्त, यज्ञ विधियों से संबंध रखने वाली प्रार्थनाएँ सम्मिलित हैं। व्याकरण में अक्षरों की होने वाली रापस्परिक संधि। ६. राजकीय अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत किया हुआ नियमों, विधियों आदि का संग्रह। (कोड) जैसे—भारतीय दंड संहिता। (इन्डियल पेनल कोड) ७. ब्रह्मा जो समस्त विश्व को धारण किये हैं और उनका नियंत्रण करता है।
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संहिताकरण  : पुं० [सं०] [भू० कृ० संहिताकृत] नियमों विधानो आदि को व्यवस्थित रूप देने की क्रिया या भाव। किसी बात या विषय को संहिता का रूप देना। (कोडिफिकेशन)
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संहित  : स्त्री० [सं०] १. संहित होने की अवस्था या भाव। २. दे० ‘संश्लेषण’
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