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बीकाम सेमेस्टर-2 व्यावसायिक प्रबन्ध

सरल प्रश्नोत्तर समूह

प्रकाशक : सरल प्रश्नोत्तर सीरीज प्रकाशित वर्ष : 2023
पृष्ठ :180
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 2731
आईएसबीएन :0

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बीकाम सेमेस्टर-2 व्यावसायिक प्रबन्ध - सरल प्रश्नोत्तर

अध्याय - 1  वेदों में प्रबन्ध व्यवहार

(Management Practices in Vedas)

'वेद' शब्द की उत्पत्ति संस्कृत भाषा के 'विद' धातु से हुई है। 'विद' धातु से ही विद्वान, विद्या तथा विदित (जाना हुआ) शब्दों की उत्पत्ति हुई है। जिसके अनुसार 'वेद' का शाब्दिक अर्थ है- ज्ञान के ग्रन्थ । इस प्रकार वेद का अर्थ है 'जानने योग्य ज्ञान के ग्रंथ' । वेद, प्राचीन भारत के पवित्र साहित्य हैं। वेद, विश्व के सबसे प्राचीन साहित्य भी हैं। भारतीय संस्कृति में वेद सनातन वर्णाश्रम धर्म के मूल और सबसे प्राचनी ग्रन्थ हैं। ये दुनिया के लगभग सबसे पुराने लिखित दस्तावेज हैं। वेद ही हिन्दू धर्म के सर्वोच्च और सर्वोपरि धर्मग्रन्थ हैं। मान्यता है कि वेदों के आधार पर ही दुनिया के अन्य मजहबों की उत्पत्ति हुई जिन्होंने वेदों के ज्ञान को अपने-अपने तरीके से भिन्न-भिन्न भाषा में प्रचारित किया। सामान्य भाषा में वेद का अर्थ है "ज्ञान" जो कि ऐसा प्रकाश होता है जो मनुष्य-मन के अज्ञान रूपी अन्धकार को नष्ट कर देता है। वेद पुरातन ज्ञान - विज्ञान का अथाह भंडार है। इसमें हर समस्या का समाधान है। वेदों में ब्रह्म (ईश्वर), देवता, ब्रह्माण्ड, ज्योतिष, गणित, रसायन, औषधि, प्रकृति, खगोल, भूगोल, धार्मिक नियम, इतिहास, रीति-रिवाज आदि लगभग सभी विषयों से संबंधित ज्ञान समाहित है।

प्राचीन भारतीय ऋषि जिन्हें मंत्रद्रिष्ट कहा गया है, उन्हें मंत्रों के गूढ़ रहस्यों को ज्ञान कर, समझ कर, मनन कर उनकी अनुभूति कर उस ज्ञान को जिन ग्रंथों में संकलित कर संसार के समक्ष प्रस्तुत किया, वे प्राचीन ग्रन्थ "वेद" कहलाये। यह भी मान्यता है कि इनके मन्त्रों को परमेश्वर ने प्राचीन ऋषियों को अप्रत्यक्ष रूप से सुनाया था। इसलिए वेदों को 'श्रुति' भी कहते हैं।

चार वेदों में ऋग्वेद सबसे प्राचीन है, ऋग्वेद शब्द ऋक् (ऋचा अथवा मन्त्र) तथा वेद (विद् अर्थात् ज्ञान) से बना है जिसका अर्थ है- ज्ञान के सूक्त ऋग्वेद में 10 मंडल, 1028 सूक्त और 10580 ऋचाएँ हैं,

यजुर्वेद में यजु दो शब्दों का मेल है, यत - जु = यजु, जिसमें यत का अर्थ है गतिशील तथा जु का अर्थ है, आकाश । यजुर्वेद की दो शाखाएँ- कृष्ण यजुर्वेद और शुक्ल यजुर्वेद हैं।

साम का अर्थ है - संगीत, सौम्या, उपासना । सामवेद गान विधा पर आधारित है। इसमें पाए जाने वाले सभी मंत्र संगीतमय हैं। इस वेद में संगीत शास्त्र का समावेश पाया जाता है । सामवेद में ऋग्वेद की ऋचाओं का संगीतमय रूप है।

थर्व का अर्थ है - कंपन और अथर्व का अर्थ है अकंपन । ज्ञान से श्रेष्ठ कर्म करते हुए जो परमात्मा की उपासना में लीन रहता है वही अकंप बुद्धि को प्रात होकर मोक्ष धारण करता है। इस वेद में रहस्यमयी विद्याओं, जड़ी बूटियों, चमत्कार और आयुर्वेद आदि का जिक्र है।

वेद भारतीय संस्कृति के मूल स्रोत हैं। वेद ही एक मात्र एक ऐसा साधन है जो मानव को लौकिक तथा पारलौकिक उन्नति के लिए उपयोगी सिद्धांत तथा उपदेशों का वर्णन है । 'वेद' का आशय है 'जानना' । वैदिक ज्ञान का उपयोग स्वाभाविक मजबूती है। वेदों में जीवन के प्रति निश्चित विचार दिये गये हैं । वैदिक संस्कृति अत्यन्त गत्यात्मक है।

वेद कहते हैं कि कोई दो व्यक्ति समान नहीं होते, इसलिए किसी एक को यह निर्धारित करना होता है कौन व्यक्ति किस कार्य को करेगा ।

आधुनिक अवधारणाएँ जैसे संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण, समय प्रबंधन, गुणवत्ता प्रबन्धन, निगमीय अधिशासन, परिवर्तन प्रबन्ध, उत्पादकता प्रबन्ध, वैश्वीकरण, प्रतियोगिता प्रबन्ध, महिला नेतृत्व, आत्म-प्रबन्ध, बेंच मार्किंग, सांस्कृतिक परिदृश्य, नीतिशास्त्र व मूल्य आदि के बारे में बताया गया है।

वेदों के गहन विश्लेषण से सिद्ध होता है कि आधुनिक व्यावसायिक प्रबन्ध व्यवहारों के विस्तृत वर्णक्रम की उत्पत्ति वेदों से हुई है।

वेदों में दो प्रकार के धन को बताया गया है-

1. Pravalat धन (Vittam)
2. सम्भावित धन (Vedyam)

वेद बार बार कहते हैं कि व्यक्ति को धन का न केवल आधिपत्यधारक होना चाहिए वरन् उसे इसका आनन्दप्रापक भी होना चाहिए।

मानव संसाधन प्रबन्ध एक ऐसा प्रबन्धकीय कार्य है जो कर्मचारियों की भर्ती, कार्य पर लगाने, तथा प्रशिक्षण व विकास से सम्बन्ध रखता है।

वेद वर्णन करते हैं कि महिलाओं के साथ समानता का व्यवहार किया जाय तथा कोई भेदभाव न हो। उन्हें पुरुषों के समान पारिश्रमिक दिया जाना चाहिए।

सामाजिक उत्तरदायित्व का अर्थ है संगठन के मुखिया की पूर्ण अथवा इकाई के रूप में जवाबदेही, जो कि संगठनात्मक क्रियाओं तथा निर्णयों के लिए दी गई भूमिका को निभाने के लिए आरोपित सत्ता का प्रयोग करने के लिए बाध्य है।

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