बी काम - एम काम >> बीकाम सेमेस्टर-2 व्यावसायिक प्रबन्ध बीकाम सेमेस्टर-2 व्यावसायिक प्रबन्धसरल प्रश्नोत्तर समूह
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बीकाम सेमेस्टर-2 व्यावसायिक प्रबन्ध - सरल प्रश्नोत्तर
महत्वपूर्ण तथ्य
• प्राचीन मत के अनुसार विधि एवं धर्म में एक अभिन्न सम्बन्ध था। विधि धर्म का ही एक अंग मानी जाती है।
• मनु के अनुसार - वेद, स्मृति, सदाचार तथा धर्म के लक्षण माने जाते थे।
• महर्षि याज्ञवल्क्य ने - विधि के ज्ञान के चौदह स्रोत बताये हैं-
वेद (चार),
वेदांग (छ:),
धर्मशास्त्र,
न्याय,
पुराण
मीमांसा।
• हिन्दू विधिशास्त्र में विधि को विकासशील माना गया है। विधि की कल्पना मानवीय आवश्यकताओं के अनुसार उसको पूरा करने के लिए की गई है।
• हिन्दू विधि के स्रोतों को मुख्यतः दो भागों में विभाजित किया जा सकता है-
(1) प्राचीन स्रोत - श्रुति, स्मृति, भाष्य एवं निबन्ध प्रथायें।
(2) आधुनिक स्रोत - न्याय, साम्य, सद्विवेक, विधायन, न्यायिक निर्णय।
• ऋग्वेद की रचना 1500 ई.पू. से 1000 ई.पू. के बीच मानी जाती है। ऋक का अर्थ है द्वन्द्वों एवं चरणों से युक्त मंत्र अर्थात् यह एक ऐसा ज्ञान है जो ऋचाओं में बद्ध है।
• ऋग्वेद में कुल दस मण्डल हैं एवं 1028 सूक्त हैं। ऋग्वेद में मंत्रों को यज्ञों के अवसर पर देवताओं की स्तुति हेतु ऋषियों द्वारा उच्चारित किया गया है।
• यजुर्वेद में यजु का अर्थ है- "यज्ञ" इसमें यज्ञों के नियमों एवं विधि-विधानों का संकलन किया गया है।
• यजुर्वेद में मंत्रों का उच्चारण करने वाले पुराहितों को "अध्वर्यु" कहा जाता है। इसके दो भाग हैं- शुक्ल यजुर्वेद एवं कृष्ण यजुर्वेद।
• सामवेद में साम का शाब्दिक अर्थ है " गान"। इसमें मुख्यतः यज्ञों के अवसर पर गाये जाने वाले मंत्रों का संग्रह है। इसमें मुख्यतः सूर्यदेव की स्तुति के मंत्र हैं।
• अथर्ववेद की रचना सबसे अन्त में हुई इसमें 731 सूक्त, 20 अध्याय तथा 6,000 मंत्र हैं। इसमें ब्रह्म ज्ञान, धर्म, समाजनिष्ठा, औषधि प्रयोग, रोग निवारण, तांत्रिक आदि अनेक विषयों का वर्णन किया गया है।
• वेदों के बाद विकास क्रम में वेदांगों का स्थान आता है। ये वेदांग छः हैं-
(1) कल्प,
(2) व्याकरण,
(3) छंद
(4) शिक्षा,
(5) ज्योतिष
(6) निरुक्त।
• उपनिषद् शब्द का साधारण अर्थ है - "समीप उपनिवेश" या "समीप बैठना "। यह शब्द 'उप', 'नि' उपसर्ग तथा 'सद्' धातु से निष्पन्न हुआ है।
• उपनिषद् हिन्दू धर्म के महत्वपूर्ण श्रुति धर्म ग्रन्थ है। ये संस्कृत भाषा में लिखे गये हैं। उपनिषदों की संख्या 108 है।
• उपनिषद् दर्शनशास्त्र पर आधारित पुस्तकें हैं। भारतीय राजचिन्ह में उल्लिखित 'सत्यमेव जयते' शब्द मुंडक उपनिषद् से लिया गया है।
• पुराणों में मत्स्यपुराण सबसे प्राचीन एवं प्रामाणिक है।
• यजुर्वेद एक ऐसा वेद है जो गद्य एवं पद्य दोनों में है।
• यजुर्वेद एवं सामवेद में किसी भी विशिष्ट ऐतिहासिक घटना का वर्णन नहीं मिलता है।
• वेदों की जटिल भाषा में कही गई बातों को पुराणों में सरल भाषा में समझाया गया है।
•'पुराण' का शाब्दिक अर्थ है 'प्राचीन आख्यान' या 'पुरानी कथा' ।
• श्रीमद् भागवत गीता के अध्यायों की संख्या 18 है तथा कुल श्लोकों की संख्या 18 हजार है।
• हिन्दू धर्म में 18 पुराण हैं। पुराणों में वर्णित विषयों की कोई सीमा नहीं है।
• प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति पर आधारित पुस्तक आयुर्वेद का उदय अथर्ववेद से हुआ है।
• मीमांसा के प्रणेता जैमिनी मुनि थे।
• धनुर्विधा यजुर्वेद पर आधारित है।
• ऋग्वेद, सामवेद तथा यजुर्वेद को " त्रयी स्वाध्याय" का नाम दिया गया है।
• वैदिक शिक्षा ने राष्ट्रीय विरासत तथा संस्कृति के प्रचार प्रसार में अनुकरणीय कार्य किया है।
• वैदिक गणित अंकगणित को सरल और तेज तरीके से हल करने के लिए तकनीकों / सूत्रों का एक संग्रह है। इसमें 16 सूत्र तथा 13 उप - सूत्र शामिल हैं।
• प्रसिद्ध गायत्री मंत्र का वर्णन ऋग्वेद में मिलता है, जिसकी रचना महर्षि विश्वामित्र ने की है।
• महाभारत को " शतसहस्त्री संहिता" के नाम से भी जाना जाता है।
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