बी काम - एम काम >> बीकाम सेमेस्टर-2 व्यावसायिक प्रबन्ध बीकाम सेमेस्टर-2 व्यावसायिक प्रबन्धसरल प्रश्नोत्तर समूह
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बीकाम सेमेस्टर-2 व्यावसायिक प्रबन्ध - सरल प्रश्नोत्तर
अध्याय - 2 प्रबन्ध : अवधारणा, प्रकृति, प्रक्रिया, महत्व तथा कार्यात्मक क्षेत्र
(Management : Concept, Nature, Process, Significance and Functional Areas)
आज का समाज संस्थाओं का समाज है तथा व्यक्ति अपने लक्ष्यों व आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए संस्थाओं पर निर्भर है, लेकिन यह प्रबन्ध ही है जो संगठनों को उत्पादक, उद्देश्यपूर्ण व कार्यशील बनाता है। प्रबन्ध संगठनात्मक जीवन की आधारभूत, समन्वयकारी व जीवन प्रेरक प्रक्रिया है । प्रबन्ध एक विशिष्ट कार्य है। कून्ट्ज एवं ओ डोनेल के अनुसार " प्रबन्ध से अधिक महत्वपूर्ण मानवीय क्रिया का संभवतः कोई क्षेत्र नहीं है। " प्रबन्ध निर्धारित उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए मानवीय व्यवहार एवं क्रियाओं का निर्देशन एवं नियंत्रण करता है। यह कार्यों की प्रक्रिया है जो समन्वित एवं सतत् रूप से चलती रहती है. जब किसी व्यक्ति या संस्था के सामने उद्देश्य को प्राप्त करने का प्रश्न उठता है, तो प्रयासों को यथाविधि, नियोजित, संगठित, निर्देशित, समन्वित व नियंत्रित करना होता है, इस प्रक्रिया को ही प्रबन्ध कहते हैं। प्रबन्ध ही लक्ष्य को प्राप्त करने का मुख्य माध्यम होता है। प्रबन्ध युक्त संगत रीति से की जाने वाली क्रिया है। यह विज्ञान व कला दोनों है तथा इसमें पेशे के सभी लक्षण जैसे- शिक्षा एवं प्रशिक्षण की विशिष्ट विधि, संवर्द्धन के लिए संगठन, आचार संहिता आदि पाये जाते हैं। प्रबन्ध जन्मजात प्रतिभा न होकर अर्जित ज्ञान से सीखा जाता है। प्रबन्ध सभी स्थानों पर सभी दशाओं में व सभी समय, समाज में पाये जाने वाले सभी प्रकार या आकार के संगठनों में लागू होने के कारण सार्वभौमिक माना जाता है। प्रबन्ध कम्पनियों, फर्मों, सहकारी, सरकारी व गैर-सरकारी विभागों तथा गैर-आर्थिक स्थानों जैसे- मन्दिर, मस्जिद, गिरिजाघर आदि सभी में होता है।
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