बी काम - एम काम >> बीकाम सेमेस्टर-2 व्यावसायिक प्रबन्ध बीकाम सेमेस्टर-2 व्यावसायिक प्रबन्धसरल प्रश्नोत्तर समूह
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बीकाम सेमेस्टर-2 व्यावसायिक प्रबन्ध - सरल प्रश्नोत्तर
महत्वपूर्ण तथ्य
• प्रबन्ध अन्य व्यक्तियों से कार्य कराने को कहा जाता है।
• प्रबन्ध का मुख्य उद्देश्य न्यूनतम प्रयत्नों एवं संसाधनों से अधिकतम परिणामों को सुनिश्चित करना होता है।
• संगठन की सफलता बहुत बड़ी सीमा तक इसके प्रबन्ध पर निर्भर करती है।
• प्रबन्ध वैयक्तिकृत होता है।
• द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात् प्रबन्ध सम्बन्धी साहित्य में अत्यन्त वृद्धि हुई है।
• न्यूमैन एवं समर ने प्रबन्ध प्रक्रिया के चार कार्य बताए हैं।
• कार्य करने की रीति एवं समय की पूर्व निर्धारण नियोजन कहा जाता है।
• प्रशासन नीति निर्माण से सम्बन्धित होता है तथा प्रबन्ध नीतियों के क्रियान्वयन से सम्बन्धित होता है।
• संस्था में संचालक मण्डल का कार्य प्रशासनिक होता है। अच्छे प्रबन्धन के लिए प्रबन्धक के पास प्रबन्ध दक्षता होनी चाहिए। पेशे के लिए व्यवस्थित ज्ञान एवं तकनीकों की आवश्यकता होती है।
• प्रबन्धक बनने के लिए किसी प्रकार की औपचारिक शिक्षा निर्धारित नहीं है।
• 'प्रशासन' 'प्रबन्ध' एवं 'संगठन' शब्द लगभग समान अर्थ वाले लगते हैं।
• प्रशासन लक्ष्य निर्धारित करता है तथा प्रबन्ध उनकी प्राप्ति करता है।
• प्रबन्ध एक व्यवहारवादी विज्ञान है।
• प्रबन्ध व्यक्तियों का विकास है न कि वस्तुओं का निर्देशन ।
• कर्मचारी वर्ग नियंत्रण एवं परिवर्तन का विरोध करता है।
• प्रबन्ध कला एवं विज्ञान दोनों है।
• प्रबन्ध शब्द प्रबन्ध प्रक्रिया का भी सूचक है।
• प्रबन्ध एक पेशा है।
• प्रबन्ध उपभोक्ताओं की जरूरतों की पूर्ति करते हैं, कर्मचारियों को कार्य प्रदान करते हैं- पूर्तिकर्त्ताओं को बाजार उपलब्ध कराते हैं तथा सरकार को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष करों के साध- न प्राप्त कराते हैं
• जॉन एफ.मी के अनुसार - "प्रबन्ध किसी भी देश के आर्थिक विकास की कुंजी है।"
• प्रबन्ध के बिना उत्पादन के साधन उत्पादक नहीं बन पाते।
• प्रबन्ध निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए मानवीय प्रयासों से सम्बन्ध रखता है।
• थियो हेमन के अनुसार - “प्रबन्ध के तीन प्रचलित अर्थ हैं-
प्रबन्ध अधिकारियों के अर्थ में
प्रबन्ध विज्ञान के अर्थ में
प्रबन्ध प्रक्रिया के अर्थ में
• प्रबन्ध की अवधारणा समय व परिस्थितियों में परिवर्तन के कारण बदलती है।
• प्रबन्ध की अवधारणाएं निम्नवत् है-
उत्पादन की साधन की अवधारणा
वर्ग अवधारणा
अधिकार सत्ता अवधारणा
वैज्ञानिक अवधारणा
कार्यात्मक अवधारणा विधा अवधारणा
नेतृत्व अवधारणा निर्णयन अवधारणा
सार्वभौमिकता की अवधारणा
पेशेवर अवधारणा
सामूहिक प्रयास अवधारणा
प्रणाली अवधारणा
मानवीय सम्बन्ध अवधारणा
व्यवहारवादी अवधारणा
परिस्थितिजन्य अवधारणा
• थियो हेमन के अनुसार - “प्रबन्ध के सिद्धांत विश्वव्यापी होते हैं। वे किसी भी प्रकार के उपक्रम में, जहाँ पर मनुष्य के समन्वित प्रयास होते हैं, लागू किए जा सकते हैं।"
• अमेरिकन प्रबन्ध एसोसिएशन के अनुसार - "प्रबन्ध एक पेशा है तथा उसी रूप में आज इसका विकास हो रहा है।"
• मानवीय सम्बन्ध अवधारणा के प्रतिपादक एल्टन मेयो है।
• वैज्ञानिक अवधारणा को आधुनिक प्रबन्ध की आधारशिला माना जाता है। इस अवधारणा के अनुसार प्रत्येक कार्य को करने की कोई सर्वोतम विधि होती है।
• प्रबन्ध की कार्यात्मक अवधारणा इसे एक प्रक्रिया के रूप में मानती है।
• प्रबन्ध के प्रमुख लक्षण इस प्रकार है-
प्रबन्ध एक प्रक्रिया है।
प्रबन्ध एक सामाजिक प्रक्रिया है।
पूर्व निर्धारित उद्देश्यों की प्राप्ति
सामूहिक प्रयास
प्रबन्ध की आवश्यकता सभी स्तरों पर
अदृश्य कौशल
अधिकार सत्ता प्रणाली
समन्वयकारी प्रक्रिया
विभिन्न विषयों से सम्बन्ध
पारिस्थितिक होना
उद्देश्यात्मक, गतिशील व निर्णयन प्रक्रिया
• प्रबन्ध साधन है, साध्य नहीं।
• प्रबन्ध 'एक जन्मजात प्रतिभा के साथ-साथ अर्जित प्रतिभा भी है।
• पेशा वह व्यवसाय है जिसके अन्तर्गत एक व्यक्ति विशिष्ट ज्ञान प्राप्त करके दूसरे व्यक्तियों को निर्देशन, परामर्श एवं मार्गदर्शन करता है।
• लॉरेन्स एप्पले का कथन है - “प्रबन्ध पेशा बन चुका है।"
लोवेल के अनुसार - “प्रबन्ध सबसे बूढ़ी कला तथा सबसे जवान पेशा है।"
प्रबन्ध में पेशे के कई लक्षण पाये जाते हैं तथा वर्तमान में यह तेजी से पेशे के रूप में उभर रहा है।
• प्रबन्ध का सामाजिक उत्तरदायित्व होता है।
• पीटर एफ ड्रकर के अनुसार - “प्रबन्ध का सामाजिक उत्तरदायित्व उपक्रम, जिसका कि वह अंग है और समाज, जिसका कि उपक्रम अंग है, दोनों के प्रति है ।"
• प्रबन्ध का उत्तरदायित्व उपभोक्ताओं, कर्मचारियों, समुदाय, आपूर्तिकर्ताओं, अंशधारकों, सरकार व राष्ट्र स्वयं तथा स्वयं के प्रति होता है।
• प्रबन्ध की पद्धति विचारधारा सभी क्रियाओं के एकीकरण एवं समन्वय पर बल देती है।
• प्रबन्ध एक गतिशील प्रक्रिया है जो कि सार्वभौमिक होती है।
• आधुनिक व्यवसाय में प्रबन्ध का सर्वाधिक योगदान है।
• ड्रकर के अनुसार - “प्रबन्ध प्रत्येक व्यवसाय का गतिशील एवं जीवनदायी तत्व है। "
• प्रबन्ध का महत्व गलाकाट प्रतियोगिता, बड़े पैमाने पर उत्पादन, आविष्कार, श्रम समस्याओं, समन्वय की आवश्यकता, उद्देश्य व लक्ष्यों की प्राप्ति आदि के कारण बढ़ा है।
• चार्ल्स ए. बियर्ड के अनुसार - “प्रबन्ध मानव की प्रगति का एक आवश्यक साधन है।"
• प्रबन्ध सम्पूर्ण सामाजिक व्यवस्था का अंग होने के कारण सामाजिक प्रणाली है, जिसमें 'अन्तर्क्रिया, अन्तर्सम्बन्ध व अन्तर्भाश्रय के लक्षण पाये जाते हैं।
• प्रक्रियात्मक दृष्टिकोण से प्रबन्ध सभी प्रकार की प्रक्रियाओं जैसे- उत्पादन, विपणन, वित्तीयन, मानव संसाधन आदि पर लागू होता है।
• प्रबन्ध भौतिक साधनों का सर्वोतम विदोहन तो करता है, किन्तु मानवीय साधन सक्रिय होने के कारण यह मूल रूप से मानवीय साधन का विकास है।
• प्रबन्ध शिक्षा में कई विषयों का समावेश होने के कारण यह बहुआयामी विषयों का अध्ययन है।
• मानव से सम्बन्धित होने के कारण संस्कृति अभिमुखी भी है।
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