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बीएड सेमेस्टर-2 हिन्दी शिक्षण

सरल प्रश्नोत्तर समूह

प्रकाशक : सरल प्रश्नोत्तर सीरीज प्रकाशित वर्ष : 2023
पृष्ठ :180
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 2760
आईएसबीएन :0

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बीएड सेमेस्टर-2 हिन्दी शिक्षण - सरल प्रश्नोत्तर

प्रश्न- गद्य व कविता में अन्तर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर-

गद्य व पद्य कविता में अन्तर निम्नलिखित हैं।

गद्य व पद्य कविता में अन्तर

क्र.सं. गद्य पद्य
1. साहित्य के रूप में सर्वप्रथम प्रादुर्भाव गद्य का हुआ। गद्य की रचना के बाद ही उसे पद्य का का स्वरूप प्रदान किया गया है।
2. गद्य का अर्थ है- 'स्पष्ट रूप से कहना। गद्य, मौखिक व लिखित भाषा का साधारण रूप अथवा सीधा, सकार, सरल कथन है। रमणीय अर्थ का प्रतिपादन करने वाले शब्द को पद्य या काव्य कहते हैं। रसात्मक, विचित्रता अथवा चमत्कार- चातुर्य से युक्त वाक्य रचना जो मनुष्यों को आनन्द प्रदान करे, कविता कही जा सकती है।
3. गद्य विधा सभी प्रकार के विचारों, भावों तथा अनुभूतियाँ की स्पष्ट प्रस्तुति तथा व्याख्या के कारण हिन्दी साहित्य में अपना विशिष्ट स्थान रखती है। परन्तु गद्य की लोकप्रियता पद्य से कम है। हिन्दी कविता, अपनी विस्तृत भावामित्यजन कोमलकान्त पदावली व मनोरम गेय बन्दों के कारण, गद्य से ज्यादा लोकप्रिय व रंजयुक्त विद्या है।
4. गद्य में भाषा का शुद्ध, स्पष्ट तथा व्याकरणं सम्मत स्वरूप प्रयोग किया जाता है। पद्य में भाषा का शुद्ध स्पष्ट तथा व्याकरण सम्मत होना आवश्यक नहीं होता है।
5. गद्य की अनेक विधायें है जैसे कहानी, लेख, नाटक, संस्मरण, उपन्यास, रिपोर्ताज साक्षात्कार, वार्तालाप, जीवनी, आत्मकथा, रेडियो नाटक तथा निबन्ध आदि। हिन्दी साहित्य में पद्य अपने समस्त रूपों (पद्य, सबद, दोहा, चौपाई, सवैये, कुण्डलियाँ और मुक्तक द्वन्द्व आदि) में अपनी छटा बिखेरती है।
6. प्रसिद्ध आलोचक 'रैनी' के अनुसार- गद्य बौद्धिक निर्माण या बौद्धिक सृजन करता है। आलोचक 'रैनी' ने लिखा है कि "पद्य सृजनात्मक अभिव्यक्ति करता है।"
7. गद्य में सरलता होती है परन्तु मनोरंजकता नहीं होती है अतः इसे कण्ठस्थ किया जाना कठिन होता है। पद्य मनोरंजक होने के कारण लोकप्रिय है तथा इसे सरलता से कण्ठस्थ किया जा सकता है।
8. गद्य का उपयोग अक्सर व्याख्या के लिए किया जाता है क्योंकि गद्य की भाषा सरल होती है। गद्य से पद्य की भी व्याख्या की जा सकती है। पद्य की भाषा जटिल व गहरा अर्थ रखने के कारण व्याख्या में प्रयुक्त नहीं की जा सकती है। पद्य की भाषा की व्याख्या गद्य में की जाती है।
9. गद्य में प्रायः अतिरंजना, अतिश्योक्ति या अत्यधिक कल्पना प्रधान असत्य में परहेज किया जाता है। कहानी, उपन्यास, नाटक आदि में जो असत्य होता है वह किसी सत्य को उद्घाटित करने का लक्ष्य लेकर चलता है। पद्य में प्रतीकात्मकता, अलंकारिकता रसात्मकता, मूर्त चित्रण व लाक्षणिकता तथा कला पक्ष से सम्बन्धित छन्दोबद्ध शैली, मूक्तक गीति शैली आदि सभी प्रवृत्तियों का निर्देशन किया गया है।

 

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