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बी एड - एम एड >> बीएड सेमेस्टर-2 हिन्दी शिक्षण बीएड सेमेस्टर-2 हिन्दी शिक्षणसरल प्रश्नोत्तर समूह
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बीएड सेमेस्टर-2 हिन्दी शिक्षण - सरल प्रश्नोत्तर
प्रश्न- प्रभावी व्याकरण शिक्षण के आवश्यक शिक्षण कौशल को बताइये।
उत्तर-
प्रभावी व्याकरण शिक्षण के लिये शिक्षण कौशल
हिन्दी भाषा की शुद्धता के लिये व्याकरण का विशेष महत्त्व होता है। व्याकरण भाषा की प्रमुख विधा है। व्याकरण का शिक्षण जितना प्रभावशाली ढंग से किया जाता है भाषा की शुद्धता उतनी अधिक होती है। गद्य एवं कविता हिन्दी शिक्षक व्याकरण का शिक्षण प्रभावी ढंग से करने में सक्षम नहीं होते हैं। व्याकरण का शिक्षण भी एक कला है जिसके लिए विशिष्ट शिक्षण कौशलों का उपयोग करना आवश्यक होता है। इस दिशा में जो शोध कार्य हुये, उनके निष्कर्ष निम्नलिखित हैं--
(अ) प्रभावी व्याकरण-शिक्षण हेतु शिक्षण कौशल - प्रभावी व्याकरण शिक्षण हेतु शिक्षण कौशल आवश्यक छः शिक्षण-कौशल हैं-
1. उदाहरणों से समझाने का कौशल
2. पुनर्बलन कौशल।
3. कक्षा व्यवस्था का कौशल।
4. सुनियोजित अभ्यास का कौशल।
5. सम्प्रेषण की पूर्णता का कौशल।
6. श्याम पट्ट उपयोग का कौशल।
(ब) प्रभावी व्याकरण-शिक्षण हेतु शिक्षण कौशल - प्रभावी व्याकरण-शिक्षण हेतु आवश्यक तीन शिक्षण कौशल हैं-
1. उद्दीपन - विषमता का कौशल।
2. छात्रों को साथ लेकर चलने का कौशल।
3. शान्त तथा अशाब्दिक संकेत कौशल।
(स) प्रभावी व्याकरण-शिक्षण हेतु सामान्य उद्देश्य - प्रभावी व्याकरण-शिक्षण हेतु सामान्य तीन शिक्षण कौशल हैं-
1. गृह-कार्य देने का कौशल।
2. प्रश्न पूछने के प्रवाह का कौशल।
3. पाठ - प्रस्तावना का कौशल।
प्रभावी व्याकरण-शिक्षण में उपरोक्त शिक्षण कौशलों के अतिरिक्त शाब्दिक तथा अशाब्दिक कक्षा अन्तः क्रिया का भी महत्त्व है। इन कौशलों का सम्पादक शिक्षण की क्रियाओं द्वारा ही होता है।
पूर्ण सेवा तथा सेवारत शिक्षकों के प्रशिक्षणों में सूक्ष्म शिक्षण पृष्ठ--पोषण प्रविधि का प्रयोग करते समय उपरोक्त क्रम के अनुसार-, कौशलों का विकास किया जाना चाहिए जिससे शिक्षकों में व्याकरण-शिक्षण में स्वामित्व का विकास किया जा सके।
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