|
बी एड - एम एड >> बीएड सेमेस्टर-2 हिन्दी शिक्षण बीएड सेमेस्टर-2 हिन्दी शिक्षणसरल प्रश्नोत्तर समूह
|
|
||||||
बीएड सेमेस्टर-2 हिन्दी शिक्षण - सरल प्रश्नोत्तर
प्रश्न- हिन्दी शिक्षण में रस एवं अलंकार का महत्त्व बताइए।
उत्तर-
हिन्दी शिक्षण में रस तथा अलंकार दोनों का ही विशेष महत्त्व रहता है क्योंकि बिना रस के हिन्दी शिक्षण नीरस हो जाएगा तथा बिना अलंकार के प्रयोग से हिन्दी शिक्षण के प्रति आकर्षण या रुचि उत्पन्न नहीं की जा सकती।
हिन्दी शिक्षण में रस का महत्त्व
हिन्दी शिक्षण में रस का विशेष महत्त्व होता है। बिना रस के शिक्षण नीरस हो जाता है। प्रत्येक चाहे वह कोई व्यक्ति हो, छात्र हो, कवि हो या शिक्षक सभी के मन में भाव अवश्य होते हैं। इन्हीं भावों का अनुभव कराना ही शिक्षण कला का एवं शिक्षक की योग्यता का प्रमाण होता है।
यदि किसी कविता में या पाठ में वीरता का रस हो तो उसे पढ़ाने से छात्रों में वही वीरता का भाव उत्पन्न कराना ही शिक्षक की योग्यता कहलाती है तथा शिक्षण एवं शिक्षा का उद्देश्य भी यही होता है कि हिन्दी शिक्षण के माध्यम से अध्यापनकर्त्ताओं को रसों की अनुभूति कराई जा सके। इससे छात्रों के संवेगों, उनकी रुचियों तथा वैयक्तिक विभिन्नताओं को विकसित होने का पूरा अवसर प्राप्त होता है।
हिन्दी शिक्षण में अलंकार का महत्त्व
हिन्दी शिक्षण में कथन अर्थात् प्रस्तुतीकरण का भी बहुत अधिक महत्त्व होता है। कोई शिक्षक किसी बात को अक्षरश- सीधे सादे ढंग से प्रस्तुत करता है तो कोई दूसरा शिक्षक उसी बात को रस एवं अलंकार से युक्त करके प्रस्तुत करता है। अलंकार युक्त भाषा शिक्षण प्रक्रिया को अधिक रुचिकर, अधिक ग्राह्य तथा उपयोगी बनाती है। शिक्षक द्वारा आदर्श पाठ तथा आदर्श वाचन में रस तथा अलंकार से युक्त व्याख्या का विशेष योगदान होता है। हिन्दी शिक्षण में अलंकार के प्रयोग करने से जहाँ एक ओर छात्रों को अलंकार तथा उनके प्रकारों का ज्ञान होता है वहीं दूसरी ओर शिक्षण अधिक रुचिकर तथा प्रभावशाली हो जाता है।
|
|||||
i 








