|
बी एड - एम एड >> बीएड सेमेस्टर-2 हिन्दी शिक्षण बीएड सेमेस्टर-2 हिन्दी शिक्षणसरल प्रश्नोत्तर समूह
|
|
||||||
बीएड सेमेस्टर-2 हिन्दी शिक्षण - सरल प्रश्नोत्तर
अध्याय 10 - हिन्दी में पाठ नियोजन
प्रश्न- पाठ नियोजन का अर्थ एवं परिभाषा बताइये। हिन्दी शिक्षण में पाठ नियोजन की आवश्यकता एवं महत्व का वर्णन कीजिए।
सम्बन्धित लघु उत्तरीय प्रश्न
1. पाठ नियोजन का अर्थ एवं परिभाषा दीजिये।
उत्तर-
पाठ नियोजन का अर्थ
किसी कार्य को क्रमबद्ध एवं सफलतापूर्वक करते हुए निर्धारित उद्देश्य (Aim) अथवा लक्ष्य (Goal) को प्राप्त करने के साधन को योजना कहते हैं। इस योजना के निर्माण की प्रक्रिया को नियोजन (Planning) कहते हैं। नियोजित ढंग से कार्य करना सुविधाजनक तथा नियमित होता है, योजना बनाकर कार्य करने से उस कार्य की अनुमानित रूपरेखा के सम्बन्ध में मार्ग निर्देशन प्राप्त होता है। इसलिए व्यक्ति को प्रत्येक कार्य को नियोजित ढंग से करना चाहिए। इसके लिए उसे किसी कार्य को प्रारम्भ करने से पूर्व उसकी योजना अवश्य बना लेनी चाहिए।
पाठ नियोजन का अर्थ (Meaning of Lesson Planning) - वर्तमान समय में किसी भी शिक्षक से यह आशा की जाती है कि वह पाठ को योजना बनाकर ही पढ़ाए जिससे निर्धारित उद्देश्यों की पूर्ति हो सके। अत- कक्षा शिक्षण से पूर्व पाठ की योजना बनाना एक महत्वपूर्ण एवं आवश्यक कार्य माना जाता है। किसी भी शिक्षक प्रशिक्षण संस्था में पाठ की योजना बनाना अवश्य सिखाया जाता है। अध्यापक द्वारा कक्षा शिक्षण हेतु पाठ की योजना बनाने की प्रक्रिया ही पाठ नियोजन कहलाती है। पाठ नियोजन का परिणाम ही पाठ योजना है।
पाठ नियोजन को विभिन्न विद्वानों ने निम्न प्रकार परिभाषित किया है-
योकम एवं सिम्पसन के अनुसार- "सभी शिक्षकों द्वारा किसी न किसी प्रकार का पाठ नियोजन अवश्य कर लेना चाहिये क्योंकि इसके पूर्ण करने के कुछ निश्चित कार्य हैं, जो अच्छे शिक्षण के लिये अपरिहार्य हैं।"
मरसेल के अनुसार- “हम पाठ योजना को समस्त आवश्यक बिन्दुओं से युक्त, चाहे वे विषय-वस्तु अथवा विधि के हों, कागज पर स्पष्ट रूप से अंकित पाठ की रूपरेखा के रूप में परिभाषित कर सकते हैं।"
लेन्डन के अनुसार- “हम पाठ योजना को समस्त आवश्यक बिन्दुओं से युक्त, चाहे वे विषय-वस्तु अथवा विधि के हों, कागज पर स्पष्ट रूप से अंकित पाठ की रूपरेखा के रूप में परिभाषित कर सकते हैं।"
|
|||||
i 








