|
बी एड - एम एड >> बीएड सेमेस्टर-2 हिन्दी शिक्षण बीएड सेमेस्टर-2 हिन्दी शिक्षणसरल प्रश्नोत्तर समूह
|
|
||||||
बीएड सेमेस्टर-2 हिन्दी शिक्षण - सरल प्रश्नोत्तर
प्रश्न- श्रुत लेख का भाषा शिक्षण में क्या महत्त्व है? स्पष्ट कीजिये।
अथवा
हिन्दी शिक्षण में श्रुतलेख के महत्त्व को स्पष्ट कीजिये।
उत्तर-
श्रुत लेखन का भाषा शिक्षण में महत्त्व
श्रुत लेख भाषा शिक्षण का एक अति आवश्यक अंग है। श्रुत लेख के द्वारा छात्र के उच्चारण दोष को तो दूर किया ही जाता है साथ ही यह उसकी ग्रहण क्षमता एवं स्मरण शक्ति को बढ़ाने में सहायक है। श्रुत लेख के द्वारा छात्र की वर्तनी दोष को दूर करके उसमें आदर्श पाठ के लाभों से लाभान्वित किया जा सकता है। श्रुत लेख में छात्र को भाषा के उचित आरोह तथा अवरोह का भी ज्ञान प्राप्त होता है। विराम चिन्हों जैसे- पूर्ण विराम, अल्प विराम, अर्द्ध विराम, प्रश्नवाचक वाक्यों, विष्मयादि बोधक चिन्हों इत्यादि के यथास्थान एवं यथोचित प्रयोग का ज्ञान तथा साथ ही उनके भावों को व्यक्त करने वाले आरोह-अवरोह युक्त स्वरों के प्रयोग का ज्ञान भी समुचित रूप से होता रहता है।
श्रुत लेख के द्वारा छात्रों में धीरे-धीरे त्रुटियों की सम्भावनाएँ कम होती जाती हैं तथा उनमें एक आत्मविश्वास की भावना विकसित होती है। श्रुत लेख से किए गए कार्य से छात्रों को प्रेरणा भी मिलती है। श्रुत लेख लेखन कला; जैसे- उचित पैरा का निर्माण, विराम चिन्हों का उचित प्रयोग, सुलेख इत्यादि में निखार आता है। लेखन कला के माध्यम से बालकों को विचार अभिव्यक्ति का अवसर प्राप्त होता है। श्रुत लेख भाषा का मौखिक तथा लिखित रूप होता है, इससे एक साथ दो बातों का अभ्यास होता है एक तो सुनने से सही-सही उच्चारण का ज्ञान प्राप्त होता है तो दूसरा यह कि उस सुनी हुई बात को सही-सही लिखने का अभ्यास। मौखिक भाषा में उच्चारण का विशेष महत्त्व होता है क्योंकि उच्चारण की अशुद्धि से अर्थ का अनर्थ हो जाता है। साथ ही शुद्ध लेखन का भी उतना ही महत्त्व होता है क्योंकि अशुद्ध लेखन भी वाक्य या शब्द के अर्थ को बदल देता है। श्रुत लेख से उक्त अशुद्धियों के दूर हो जाने से लेखन की गति बढ़ जाती है तथा छात्रों की ग्राह्यय शक्ति एवं स्मरण शक्ति में भी वृद्धि होती है।
|
|||||
i 








