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बी एड - एम एड >> बीएड सेमेस्टर-2 हिन्दी शिक्षण बीएड सेमेस्टर-2 हिन्दी शिक्षणसरल प्रश्नोत्तर समूह
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बीएड सेमेस्टर-2 हिन्दी शिक्षण - सरल प्रश्नोत्तर
प्रश्न- उच्चारण की अशुद्धता से वर्तनी दोष होता है। स्पष्ट कीजिए।
अथवा
'अशुद्ध उच्चारण से वर्तनी की अशुद्धियाँ होती हैं और इसका प्रभाव रचना पर भी पड़ता है।" इस कथन की पुष्टि कीजिए।
अथवा
अशुद्ध वर्तनी होने के कारणों का उल्लेख कीजिए।
अथवा
'अशुद्ध वर्तनी से उच्चारण भी अशुद्ध होता है।' इस कथन की विवेचना करते हुए वर्तनी की अशुद्धियों के निवारण हेतु अपने सुझाव दीजिए।
उत्तर-
हिन्दी भाषा बोलने तथा लिखने में अन्तर पाया जाता है इसका कारण भौगोलिक परिस्थितियाँ होती हैं क्योंकि अक्षरों तथा शब्दों के उच्चारण में अन्तर आता है। यही भेद वर्तनी में हो जाता है। उच्चारण तथा वर्तनी परस्पर पूरक होती हैं और एक-दूसरे को प्रभावित भी करती हैं।
वर्तनी का अर्थ अक्षरों को सुडौल तथा सुन्दर लिखने से नहीं होता है अपितु शब्दों में निहित अक्षरों या वर्णों को शुद्ध रूप में तथा सही क्रम में लिखा जाये। शुद्ध वर्तनी भाषा का एक शुद्ध रूप प्रस्तुत करती है। इसलिए भाषा शिक्षा का वर्तनी एक महत्त्वपूर्ण अंग है। शुद्ध वर्तनी का प्रभाव पठन, उच्चारण तथा रचनागत व अन्य रूपों पर पड़ता है।
अशुद्ध उच्चारण से वर्तनी दोष
उच्चारण की अशुद्धता से वर्तनी दोष हो जाता है जिसके कारण निम्नलिखित हैं-
(1) भाषा के उच्चारण में स्थानीय व भौगोलिक प्रभाव होता है। हिन्दी भाषी क्षेत्रों में उच्चारण में अधिक अन्तर है।
(2) हिन्दी लिपि अथवा वर्तनी का शुद्ध ज्ञान न होना।
(3) अशुद्ध उच्चारण को सुननें या बोलने अथवा एक रूपता का अभाव होना जैसा उच्चारण हो उसी के अनुरूप लिखा भी जाये। व्याकरण के रूपों का ज्ञान न होना।
(4) शब्दों अथवा लेखन अभ्यास के अभाव के कारण भी अशुद्धियाँ होती हैं।
(5) अक्षरों, शब्दों, मात्राओं का अनुस्वार का सही ज्ञान न होना।
(6) व्याकरण के रूपों का ज्ञान न होना।
(7) लिखने में शीघ्रता करने से भी अशुद्धियाँ होती हैं।
(8) अध्यापक छात्रों की अक्षर विन्यास सम्बन्धी अशुद्धियों की ओर ध्यान नहीं देते और न ही उन्हें चिन्हित करते हैं।
(9) हिन्दी में 'ई' और 'यी' की अशुद्धियों का प्रयोग प्रचलित है जैसे 'खायी', 'खाई', 'राई' को 'रायी' लिखना।
(10) 'ऋ' तथा 'रि' के उच्चारण में अशुद्धि के कारण छात्रों में वर्तनी दोष पाया जाता है।
(11) विद्यार्थियों द्वारा अशुद्ध मात्रा लगाने की भूलें भी यथेष्ट मात्रा में हो जाती हैं जैसे 'कुरूप ' (कुरूप) आदि।
(12) वर्णों में उच्चारण की कुछ समता होना।
(13) रूप-रचना का ज्ञान न होना।
(14) त्रुटियों का उचित संशोधन न होना।
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