बी एड - एम एड >> वाणिज्य शिक्षण वाणिज्य शिक्षणरामपाल सिंहपृथ्वी सिंह
|
0 |
बी.एड.-1 वाणिज्य शिक्षण हेतु पाठ्य पुस्तक
18
वाणिज्य कक्ष
(COMMERCE ROOM)
टौनी. ए. हरबर्ट ने अपनी पुस्तक "वाणिज्य शिक्षा के सिद्धान्त” में वाणिज्य
का अर्थ स्पष्ट करते हुए कहा है “वाणिज्य आर्थिक ढाँचे का वह पहलू है जो
व्यवसाय और औद्योगिक उत्पादन के प्रबन्ध एवं वितरण से सम्बन्धित है और इस
प्रकार सम्पूर्ण आर्थिक ढाँचे का समन्वय करने वाला तत्त्व है।"
राष्ट्र के आर्थिक विकास के साथ-साथ वाणिज्य व उद्योग का भी तीव्र गति से
विकास हो रहा है। आज वाणिज्य शिक्षा की आवश्यकता बढ़ती ही जा रही है। शिक्षा
जगत में वाणिज्य का भविष्य उज्ज्वल है। इस स्थिति में अध्यापकों, समाज के
कर्णधारों. शिक्षा विभाग व सरकार को सही भूमिका निभाने की आवश्यकता है।
वाणिज्य शिक्षा के व्यावसायिक पक्ष पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है ताकि
छात्र भविष्य में सही व्यापारिक इन्सान बन सकें तथा रोजगार स्वयं उनके दरवाजे
पर दस्तक दें। आज के, शिक्षा जगत में छात्रों को कई प्रकार की क्रियाओं के
सम्बन्ध में जानना आवश्यक होता है. विषय के उचित समन्जन के लिए यह आवश्यक है
कि छात्र क्रियाशील होकर कार्य करें ताकि उनमें उचित कौशलों का विकास हो सके।
आज का युग विशेषीकरण का युग है इसमें मशीनों के व्यापक प्रयोग से वाणिज्य
क्षेत्र बहुत व्यापक हो गया है। समस्त आर्थिक और व्यापारिक क्रियाएँ वाणिज्य
के क्षेत्र में आ गई हैं। वाणिज्य-शिक्षण में अनेक प्रकार के उपकरणों की
आवश्यकता होती है। हमारे वर्तमान माध्यमिक विद्यालयों में इनका अभाव सर्वत्र
दिखलाई देता है। वाणिज्य एक व्यावहारिक विषय है इसके अनेक उपविषय हैं। जैसे
व्यापार पद्धति, बहीखाता. वाणिज्यिक भूगोल, आशुलिपि, टंकण आदि इनका
व्यावहारिक ज्ञान छात्रों के लिए नितान्त आवश्यक है। आज शिक्षाशास्त्री
क्रिया प्रदान शिक्षा पर बल देते हैं। करके सीखने के सिद्धान्त पर अधिक बल
दिया जा रहा है। छात्र को यदि पत्र फाइल करने के केवल सिद्धान्त बता दिये
जायें तो वे उपयोगी साबित नहीं हो सकते हैं। यही बात टाइप पर भी लागू होती
है। छात्रों में यदि उचित व्यावसायिक कुशलता का विकास करना है तो विज्ञान की
तरह वाणिज्य के भी अलग-अलग कक्ष बनाने होंगे और उन्हें विभिन्न साधनों व
उपकरणों से सुसज्जित करने होंगे।
वाणिज्य के शिक्षण को प्रभावशाली बनाने के लिये वाणिज्य कक्ष की नितान्त
आवश्यकता को सर्वत्र स्वीकारा गया है क्योंकि वाणिज्य का अलग कक्ष विषय के
लिए अनुकूल वातावरण का सृजन करता है । कक्षा अध्यापक को अध्यापन के समय
विषयगत सामग्री को उठाकर एक कक्ष से दूसरे कक्ष तक नहीं ले जाना पड़ता उससे
मुक्ति मिलेगी तथा समय का अपव्यय भी होने से बचता है। विषय की सारी सामग्री
एक ही स्थान पर उपलब्ध होने से छात्रों व अध्यापकों को दोनों को ही लाभ होता
है। अध्यापक कक्ष में मौजूद साधनों से विषय की व्याख्या आसानी से कर पाता है
तथा छात्रों से भी व्यावहारिक रूप से करा सकता है फलस्वरूप इस प्रकार से
अर्जित ज्ञान अधिक समय- तक स्थायी ज्ञान होता है। वाणिज्य कक्ष के उपकरण अपना
विशेष शैक्षिक महत्व रखते हैं हालाँकि इन उपकरणों को शैक्षिक महत्ता उसके
संचालक विषय के अध्यापक की योग्यता पर निर्भर करती है। विद्यालय में वाणिज्य
कक्ष होने से उपकरणों व मशीनों जैसे लीथो प्रेस व टाइप मशीनें इन्हें सुरक्षा
व स्थायित्व भी प्रदान किया जा सकता है। विद्यालय में वाणिज्य कक्ष छात्रों
के मानसिक विकास के लिए भी उचित घरातल प्रदान करता है। इससे हम छात्रों की
तर्क शक्ति व चिन्तन शक्ति व निर्णय शक्ति को नई दिशा प्रदान कर सकते हैं।
वाणिज्य कक्ष व उसकी साधन सम्पन्नता वाणिज्य का शिक्षण पूरा नहीं कहा जा सकता
है। उपरोक्त तथ्यों के आधार पर वाणिज्य के कक्ष कों वाणिज्य की
वास्तविक प्रयोगशाला कह सकते हैं अतः स्पष्ट है कि वाणिज्य कक्ष का वाणिज्य
शिक्षण में छात्र व अध्यापक दोनों की ही दृष्टि से महत्त्व होता है।
वाणिज्य कक्ष कैसा हो
वाणिज्य कक्ष कैसा हो, इस सन्दर्भ में जब विचार करते हैं तो यह जानना चाहिए
कि मख्य कक्ष कैसा हो, कितना बड़ा है उसमें क्या-क्या उपकरण हो, उसमें वायु व
प्रकाश की व्यवस्था किस प्रकार की हो, छात्रों के बैठने का स्थान कहाँ व कैसे
हो तथा अन्य कक्ष कितने हों. उनमें क्या-क्या सुविधाएँ होनी चाहिए ताकि छात्र
वहाँ अधिक से अधिक व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त कर सके तथा विषय के शिक्षण को
सफल बनाया जा सके। यथासम्भव वाणिज्य कक्ष तल स्थल के ऊपर होना चाहिए ताकि
छोटे-बड़े उपकरण सुविधाजनक ढंग से लगाये जा सकें। इससे टाइप मशीनों की तथा
अन्य मशीनों की आवाजें अन्य कक्षाओं को ध्यान न बँटा सके। छात्रों की संख्या
को ध्यान में रखकर वाणिज्य कक्ष बनाया जाना चाहिए। आवश्यकतानुसार व समय के
अनुसार अधिक छात्रों की आवश्यकताओं को भी इसमें ध्यान में रखना चाहिए।
अध्यापकों के लिए भी अलग कक्ष होना चाहिए।
किसी माध्यमिक विद्यालय में जहाँ वाणिज्य संकाय स्थापित किया गया है वहाँ
वाणिज्य संकाय के लिए आदर्श रूप में 5 कमरे अवश्य होने चाहिए-
(1) वाणिज्य का प्रमुख कक्ष
(2) टंकण एवं आशुलिपि कक्ष
(3) यन्त्र कक्ष
(4) बहीखाता कक्ष
(5) कम्प्यूटर कक्ष
सम्भवतः ये चारों कमरों की स्थिति आसपास में ही होनी चाहिए ताकि
आवश्यकतानुसार उनमें से एक-दूसरे कमरे में आने-जाने की सुविधा हो।
(1) वाणिज्य प्रमुख कक्ष-वाणिज्य का प्रमुख कक्ष अन्य कमरों से तीन गुना बड़ा
होना चाहिए और इस कमरे से अन्य कमरों में आने-जाने का मार्ग होना चाहिए। अन्य
कमरे विश्वविद्यालयी कक्षाओं की तरह सीढ़ीनुमा हो तो उपयुक्त रहता है। उनमें
मेजें व कुर्सियों की व्यवस्था भी उसी के अनुरूप बनाई जानी चाहिए तथा कक्ष
में प्रकाश की उचित व्यवस्था होनी चाहिए। प्रकाश की उचित व्यवस्था के लिए
खिड़कियाँ काँच की बनाई जानी चाहिए। सामने की दीवार पर ही चाक पट्ट बनाया
जाना चाहिए ये अगर काँच के बनाये जायें तो अधिक अच्छे व अधिक आयु के रहते
हैं। इस कक्ष में वाणिज्य के उपकरणों को भी रखने की समुचित व्यवस्था होनी
चाहिए। मुख्य कक्ष में अलमारियों व प्रोजेक्ट के लिए भी उचित स्थान प्रदान
किया जाना चाहिए। इनके अलावा इस कक्ष में सन्दर्भ पुस्तकें व पत्र-पत्रिकाएँ
भी रखने की दराज होनी चाहिए ताकि विषय को इनकी सहायता से परिपूरक करने में
सुविधा रहे । अध्यापक का बैठने का स्थान इसमें ऐसे स्थान पर होना चाहिए जहाँ
से वह सभी उपस्थित छात्रों को नजर में रख सके व उनके कार्यों का निरीक्षण कर
सके व आवश्यकतानुसार उचित निर्देश प्रदान कर सके। मुख्य कक्ष के अलावा
वाणिज्य कक्ष में अन्य कक्ष भी होते हैं आशुलिपि और बही खाते ऐसे विषय हैं
जिनमें छात्रों का अवधान केन्द्रित करने की अपेक्षा की जाती है अतः ये कक्ष
विद्यालय के अन्य सामान्य कक्षों से परे अलग तरफ होने चाहिए ताकि छात्रों का
अवधान न बँट सके।
(2) टंकण एवं आशुलिपि कक्ष-इस कक्ष का आकार छात्रों की संख्या पर निर्भर करता
है। टंकण व आशुलिपि सिखाने के लिए अलग कक्ष नितान्त आवश्यक है। इस कक्ष में
मेजों पर छात्रों की संख्या के हिसाब से टंकण रखे होने चाहिए तथा एक ओर पत्र
आदि लटकाने का स्टेण्ड होना चाहिए। सुविधानुसार छात्रों को पेपर ट्रे भी दी
जानी चाहिए। इसमें प्रत्येक विद्यार्थी को 25 वर्गफुट की जगह मिलनी चाहिए।
टंकण कक्ष का आकार 30' x 35' का होना चाहिए। टंकण कक्ष में पर्याप्त प्रकाश
की भी व्यवस्था होनी चाहिए। इस कक्ष में दो श्यामपट होने चाहिए। सामने वाला
टंकण अध्यापन के लिए तथा बायाँ आशुलिपि अध्यापन के लिए उचित रहता है। इनके
अलावा बुलेटिन पत्र भी होने चाहिए। उपकरण रखने के लिए अलमारी भी होनी चाहिए,
जिसमें टंकण से सम्बन्धित औजार उसमें रखे जा सकें। सामने दीवार पर टंकण
सम्बन्धी चार्ट होने चाहिए।
(3) यन्त्र कक्ष-यह कक्ष विशेष रूप से.वाणिज्य के उपकरण को रखने हेतु होता
है। इस कक्ष का आकार अन्य कक्षों से कुछ छोटा होता है। अध्यापक आवश्यकतानुसार
यहाँ से वाणिज्य शिक्षण को सफल बनाने हेतु उपकरण कक्षा में ले जाता है। इस
कक्ष में भी प्रकाश की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए। इस कक्ष का एक दरवाजा
टंकण कक्ष में एक बहीखाता कक्ष में खुलना चाहिये। इस कक्ष का आकार 18' x 25
का होना चाहिए। चार्ट मॉडल रखने हेतु उचित स्थान होना चाहिए तथा वाणिज्य की
पुस्तकें रखने हेतु भी उचित स्थान होना चाहिए। इस कक्ष में एक तरफ खड़ी फाइल
रखने की भी व्यवस्था होनी चाहिए। इस कक्ष में निम्न उपकरणों की व्यवस्था होनी
चाहिए-
(1) पाठ्य-पुस्तकें, पत्र-पत्रिकाएँ सन्दर्भ पुस्तकें.
(2) गणना यन्त्र
(3) विषय से सम्बन्धित चित्र, चार्ट, मॉडल आदि,
(4) टाइपराइटर,
(5) पंच करने की मशीन,
(6) खडी फाइल केबिनेट,
(7) रोटरी डुपलीकेटर.
(8) फ्रेकिंग मशीन का मॉडल
(9) लीथो प्रेस.
(10) कार्ड इन्डेक्स.
(11) आवक-जावक रजिस्ट्रार,
(12) बैंक मॉडल.
(13) मुद्रक यन्त्र
(14) बीजक मुद्रण यन्त्र,
(15) कैलकुलेटिंग यन्त्र,
(16) ग्राफ बोर्ड एवं नक्शे.
(17) छेद करने की मशीन,
(18) स्क्रीन,
(19) प्रोजेक्टर.
(20) चेक लिखने की मशीन,
(21) विभिन्न बीमा प्रपत्र.
(22) मैजिक लैन्टर्न.
(23) दीवार घडी.
(24) रेडियो,
(25) टेप रिकार्डर
(26) विभिन्न प्रकार के व्यापारिक प्रपत्र .
(27) टाइप सेटिंग यन्त्र,
(28).बहीखाता यन्त्र।
(4) बहीखाता एवं व्यापार पद्धति-कक्ष-बहीखाता एवं व्यापार पद्धति कक्ष
सामान्य कक्षों की ही तरह एक कक्ष होना चाहिए। बहीखाता के लिए छात्रों के
ध्यान की एकाग्रता की अधिक आवश्यकता होती है, अतः यह कक्ष वाणिज्य विभाग के
एक तरफ बनाया जाय तो अधिक अच्छा रहता है ताकि शोरगुल न हो, शान्त वातावरण मिल
सके।
इस कक्ष का आकार 25 x 35% का होना चाहिए। इस कक्ष में हर छात्र के लिए कुर्सी
व टेबल की व्यवस्था होनी चाहिए। बहीखाते में टेबल का आकार कुछ बड़ा हो तो ठीक
रहता है। दीवार पर बुलेटिन पत्र होना चाहिए। कक्ष की दीवारों पर छात्रों व
अध्यापिका द्वारा निर्मित चार्ट, मॉडल रेखाचित्र लगे होने चाहिए. उपकरण व
यन्त्र आदि रखने के लिए अलमारियाँ होनी चाहिए।
(5) कम्प्यूटर कक्ष (Computer Room)-आज के वैज्ञानिक युग में कम्प्यूटर की
उपयोगिता जीवन के हर क्षेत्र में बढ़ गई है। व्यापार, उद्योग, शिक्षा,
शिक्षण, मनोरंजन, बैंक, बीमा. सैन्य-विज्ञान, ज्योतिष, भवन-निर्माण, चिकित्सा
आदि जीवन के सभी क्षेत्रों में कम्प्यूटर की उपयोगिता प्रमाणित हो चुकी है।
इसलिये वाणिज्य कक्ष (जिसे हम वाणिज्य-शिक्षण की प्रयोगशाला भी कहें तो उत्तम
है) के साथ एक कम्प्यूटर कक्षा भी होनी चाहिये। कम्प्यूटर कक्ष में छात्रों
की संख्या के हिसाब से पर्याप्त कम्प्यूटर, प्रिन्टर्स, आवश्यक सोफ्टवेयर्स,
फर्नीचर, आदि होने चाहिये। कम्प्यूटर कक्ष में प्रकाश की समुचित व्यवस्था हो,
इसकी संरचना ऐसी हो कि कमरे में धूल आदि न जा सके, कमरे में कम्प्यूटर से
सम्बन्धित साहित्य, फ्लॉपी, सी. डी. (C.D.) आदि रखने के लिये भी सुरक्षित एवं
पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिये।
इस प्रकार उपरोक्त बातों को ध्यान में रखकर एक आदर्श वाणिज्य कक्ष तैयार कर
सकते हैं, हालाँकि इन भौतिक सुविधाओं व साधनों के संग्रह करने में काफी
आर्थिक सहायता की आवश्यकता होती है और यह विद्यालय की आर्थिक दशा पर निर्भर
करता है कि वह इन उपरोक्त सुविधाओं को जुटाने में सक्षम है या नहीं। चूँकि
शिक्षा राज्यों का विषय है और भारत में अधिकांशतः राज्यों की आर्थिक स्थिति
अच्छी नहीं कहीं जा सकती है। अधिकतर माध्यमिक विद्यालय आवश्यक भवनों से भी
वंचित हैं, तथा सामान्य सामग्री भी नहीं जुटा पाते हैं। अतः वे किसी संकाय के
लिए अलग कक्ष की व्यवस्था व व उपकरणों व यन्त्रों का ढेर लगाने में असमर्थ
है, फिर भी वाणिज्य के अध्यापक को विषय की महत्ता को देखते हुए
प्रधानाध्यापक, शिक्षा विभाग, बोर्ड व राज्य सरकारों का ध्यान निरन्तर इस ओर
आकर्षित करते रहना चाहिए तथा शनैः शनैः वाणिज्य कक्ष को समय के अनुरूप बनाने
में प्रयत्नशील रहना चाहिए।
अभ्यास-प्रश्न
निबन्धात्मक प्रश्न
1. वाणिज्य के सफल शिक्षण के लिये विशिष्ट रूप से वाणिज्य कक्ष होना चाहिये।
इस कथन पर अपने विचार लिखिये।
-2 वाणिज्य कक्ष की व्यवस्था आप किस प्रकार करेंगे? स्पष्ट कीजिये।
3. वाणिज्य शिक्षण के लिये प्रमुख रूप से किन-किन कक्षों का होना आवश्यक है?
प्रत्येक कक्ष का सामान्य परिचय दीजिये।
लघु उत्तरात्मक प्रश्न
1. वाणिज्य कक्ष कैसा होना चाहिये? संक्षेप में लिखें। ।
2. कम्प्यूटर रूम के लिये आवश्यक साज-सज्जा का परिचय दीजिये।
3. वाणिज्य के यंत्र कक्ष के लिये आवश्यक यंत्रों की सूची बनाइये।
वस्तुनिष्ठ प्रश्न
1. पूर्व-निर्धारित उद्देश्यों तथा प्राप्त मूल्यों के अभाव में मूल्यांकन
नहीं हो सकता है।
2. निबन्धात्मक परीक्षाओं के लाभ किसने बताये हैं?
(अ) वेस्ले तथा रॉन्सकी
(ब) डॉ० एन० हसन
(स) ड्यूवी
(द) रॉबर्ट मैगर
3: वस्तुनिष्ठ परीक्षाएँ 'पर आधारित होती हैं।
उत्तर-1. वास्तविक । 2. (अ) वेस्ले तथा रॉन्सकी। 3. वस्तुस्थिति।
|