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बी एड - एम एड >> बी.एड. सेमेस्टर-1 प्रश्नपत्र- IV-B - मूल्य एवं शान्ति शिक्षा बी.एड. सेमेस्टर-1 प्रश्नपत्र- IV-B - मूल्य एवं शान्ति शिक्षासरल प्रश्नोत्तर समूह
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बी.एड. सेमेस्टर-1 प्रश्नपत्र- IV-B - मूल्य एवं शान्ति शिक्षा
प्रश्न- क्या मानव जाति के लिए ‘अहिंसा’ विश्व स्तर पर शांति का एक महत्वपूर्ण मूल्य है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
सम्पूर्ण मानव जाति के लिए अहिंसा विश्व शांति के रूप में - अहिंसा का सामान्य अर्थ ‘हिंसा न करना’। इसका व्यापक अर्थ - किसी भी प्राणी के प्रति शरीर, मन, कर्म, वचन एवं वाणी से किसी प्रकार की हानि न पहुंचाना। मन में किसी के प्रति अहिंसा का भाव न लाना। कर्म वाणी से किसी को आहत न करना एवं धर्म में भी किसी अवस्था में किसी प्राणी को हिंसा न करना।
हिंदू धर्म में अहिंसा को बहुत महत्व है ‘अहिंसा परमो धर्मः’ (अहिंसा सबसे बड़ा धर्म है) ऐसा कहा गया है। आधुनिक काल में महात्मा गांधी ने भारत की आजादी के लिए जो आंदोलन चलाया वह काफी सीमा तक अहिंसात्मक था।
अहिंसा का सर्वोच्च उदाहरण भगवान बुद्ध ने अपने उपदेशों में किया था। भगवान बुद्ध के उपदेशों का असर हुआ कि उस समय यज्ञों के दौरान पशु हिंसा होती थी, वह समाप्त हो गई। परंतु कालांतर में अहिंसा का अर्थ अनेक रूपों से गलत समझने के कारण राष्ट्रों के बीच में संघर्ष बढ़े, अनेक आक्रमण हुए और देश गुलाम हो गए। भगवान बुद्ध के बाद दूसरे थे महावीर स्वामी, जिनका अहिंसा के प्रति नृण बहुत प्रभाव रहा। जैन धर्म की परंपराओं में तो शरीर पर कोई परिधान भी हिंसा माना जाता है, परंतु महावीर स्वामी के परवर्ती जो अहिंसा का पालन अपने सही रूप में नहीं कर सके। जैन धर्म में यम के पांचों सूत्र प्रख्यात हो गए- अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य एवं अपरिग्रह।
पश्चिमी जगत में करुणा एवं प्रेम का संदेश देने वाले ईसा अहिंसा के अनुपम मानने लगे, परंतु अहिंसा के सिद्धांत का प्रतिपादन करने वाले भगवान यीशु, जो परोपकार करते थे, उन्हें सूली पर चढ़ा दिया गया। परिणाम अंततः युद्ध रहा अंत में भगवान यीशु के अनुयायियों ने अहिंसा के मूल अर्थ को ठीक प्रकार से नहीं समझा।
भारतीय चिंतन में हमें अहिंसा को समन्वय से जानना होगा। महाभारत युद्ध के आरंभ में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को युद्ध करने के लिए प्रेरित किया। भगवान श्रीकृष्ण का दृष्टि में अहिंसा वही है, जो धर्म के लिए हो, जहां कोई अत्याचार न हो, अन्याय न हो, दमन न हो और सामाजिक पतन एवं धर्म का ह्रास न हो। वह पुरुष स्वयं लोगों को मारकर भी आत्मा में मरा होता है और न ही वह मारा है। वेदों में तो अहिंसा के परम अर्थ माने गए हैं एवं यह परोपकार के साथ भी जोड़ी गई है।
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