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बी एड - एम एड >> बीएड सेमेस्टर-2 हिन्दी शिक्षण बीएड सेमेस्टर-2 हिन्दी शिक्षणसरल प्रश्नोत्तर समूह
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बीएड सेमेस्टर-2 हिन्दी शिक्षण - सरल प्रश्नोत्तर
प्रश्न- व्याकरण शिक्षण के उद्देश्य बताइये।
अथवा
व्याकरण शिक्षण के सामान्य उद्देश्यों का उल्लेख कीजिए।
अथवा
व्याकरण शिक्षण के उद्देश्यों का विवेचन कीजिए।
उत्तर-
व्याकरण शिक्षण के उद्देश्य
व्याकरण शिक्षण के प्रमुख उद्देश्य अधोलिखित हैं-
1. विद्यार्थियों को विविध ध्वनियों का ज्ञान देना।
2. व्याकरण के द्वारा विद्यार्थियों में रचना तथा सृजनात्मक प्रवृत्ति का विकास करना, चार कौशलों पढ़ना, लिखना, बोलना तथा सुनना का विकास करना।
3. विद्यार्थियों को शुद्ध भाषा का प्रयोग सिखाना।
4. विद्यार्थियों में ऐसी क्षमता उत्पन्न करना जिससे कि वे कम-से-कम शब्दों में शुद्धतापूर्वक अपने भावों को व्यक्त कर सकें। साथ ही साथ ऐसी योग्यता उत्पन्न करना जिससे कि वे भाषा की अशुद्धता को समझ सकें और उनमें भाषा को परखने की शक्ति का विकास करना।
5. विद्यार्थियों को शुद्ध बोलने, लिखने तथा पढ़ने की प्रेरणा देना।
6. विद्यार्थियों में ऐसी योग्यता उत्पन्न करना जिससे कि वे भाषा की अशुद्धता को समझ सकें तथा उसमें भाषा को परखने की शक्ति विकसित हो सके। व्याकरण से भाषा में दक्षता विकसित करना।
7. विद्यार्थियों को भाषा से सम्बन्धित नियमों का ज्ञान प्रदान करना और उनको भाषा में प्रयोग करना।
8. विद्यार्थियों को शुद्ध उच्चारण की शिक्षा प्रदान करना।
9. विश्न गाई एवं पाकाक के मतानुसार- "व्याकरण की शिक्षा का उद्देश्य बालक को भाषा की वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखने में प्रवीण बनाना होना चाहिए।"
10. पं० लज्जा शंकर झा ने लिखा है कि- "भाषा का शुद्ध रूप पहचानने में छात्रों को सक्षम व समर्थ बनाना ही व्याकरण का उद्देश्य है। इस प्रकार व्याकरण से शुद्ध बोलना एवं लिखना आ जाता है।'
11. चैम्पियन के मतानुसार- व्याकरण के नियमों का ज्ञान छात्रों में मौलिक वाक्य बनाने की योग्यता उत्पन्न करता है। मितव्ययिता के आधार हेतु व्याकरण का ज्ञान आवश्यक है। यह छात्रों में शुद्ध रूप से बोलने एवं लिखने की क्षमता पैदा करता है।
12. भाषा-विश्लेषण की योग्यता का विकास करना और शुद्ध तथा अशुद्ध भाषा की पहचान कर 'सकना, भाषा के मानकों के शुद्ध उपयोग की क्षमताओं को विकसित करना है।
व्याकरण की शिक्षा, भाषा की शिक्षा का आवश्यक अंग है। यह भाषा रूपी रथ का सारथी है। यह भाषा को स्वयं बनाता है तथा उस पर नियन्त्रण रखता है। यह भाषा का मित्र भी है। यह उसे सच्चे रास्ते पर चलने की प्रेरणा प्रदान करता है।
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