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बी एड - एम एड >> बीएड सेमेस्टर-2 हिन्दी शिक्षण बीएड सेमेस्टर-2 हिन्दी शिक्षणसरल प्रश्नोत्तर समूह
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बीएड सेमेस्टर-2 हिन्दी शिक्षण - सरल प्रश्नोत्तर
प्रश्न- वाचन का अर्थ बताइए। वाचन के शिक्षण की कौन-सी विधियाँ हैं? समझाइए।
सम्बन्धित लघु उत्तरीय प्रश्न
1. वाचन का अर्थ बताइए।
उत्तर-
वाचन का अर्थ
'वाचन' एक कला है। वाचन की जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में आवश्यकता होती है। व्यक्ति का सबसे बड़ा आभूषण उसकी सुसंस्कृत एवं वाणी है। क्योंकि अन्य सभी आभूषण तो टूट या घिस जाते हैं किन्तु वाणी सदा बनी रहती है क्योंकि व्यक्ति का एकमात्र आभूषण उसकी मधुर वाणी है। अमृत भी मधुर वाणी में होता है। मनुष्य अपने भावों एवं विचारों को बोलकर अथवा लिखकर व्यक्त करता है। भावों एवं विचारों का सम्प्रेषण या प्रकाशन ही रचना है। अतः रचना के दो मुख्य रूप हैं-मौखिक रचना एवं लिखित रचना।
कैथरीन ओकानर के अनुसार- " वाचन वह जटिल सीखने की प्रक्रिया है, जिसमें सुनने के गतिवाही माध्यमों का मानसिक पक्षों से सम्बन्ध होता है। "
भाषा शिक्षण वाचन एवं लिखने से आरम्भ किया जाता है। इस सम्बन्ध में सभी एक मत नहीं हैं। माण्टेसरी शिक्षा प्रणाली लिखने से आरम्भ करने के पक्ष में है परन्तु अन्य सभी वाचन से आरम्भ करने के पक्षधर हैं क्योंकि ध्वनि से ज्ञान सरल है लिखने से बोलना सरल होता है। लिखने से ध्वनि और लिपि के रूप को समझने में समय भी लगता है। लिपिबद्ध शब्दों को सरलता से पढ़ाया जा सकता है।
हिन्दी के शिक्षकों को भाषा सिखाने अथवा वाचन के लिए अलग से आवश्यकता नहीं होती है। वाचन में शब्दों के उच्चारण का विशेष महत्त्व होता है।
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