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बी एड - एम एड >> बीएड सेमेस्टर-2 हिन्दी शिक्षण बीएड सेमेस्टर-2 हिन्दी शिक्षणसरल प्रश्नोत्तर समूह
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बीएड सेमेस्टर-2 हिन्दी शिक्षण - सरल प्रश्नोत्तर
प्रश्न- आदर्श पठन के महत्त्व को विविधता रूप से समझाइये।
उत्तर-
आदर्श पठन के महत्त्व के विविधता रूप
पठन का दूसरा पर्यायवाची शब्द वाचन है। 'पढ़ना' यह शब्द शिक्षा प्राप्ति का साधन है। जब हम कोई पुस्तक पत्र, पर्ची या लिखित सामग्री पढ़ते हैं उसी को वाचन या पठन कहते हैं। पठन आनन्द प्राप्ति का सर्वोत्तम साधन है। यात्रा में, अकेलेपन में, खाली समय में, वाचन मित्र की तरह साथ निभाता है। पठन द्वारा व्यक्ति जब भावों एवं विचारों के सागर में डूब जाता है तब उसे अलौकिक आनन्द की प्राप्ति होती है। बाह्य जगत के दुःखों को कुछ समय के लिए भूल जाता है। पठन मानव के सर्वांगीण विकास में सहायक होता है तथा यह हमारे जीवन का एक अभिन्न अंग है।
जॉन कॉटन डैना ने पठन के विषय में कहा है-" पढ़ो, पढ़ो कुछ और पढ़ो, कुछ भी पढ़ो, प्रत्येक वस्तु के विषय में पढ़ो, मनोरंजक सामग्री पढ़ो, रुचिकर सामग्री पढ़ो, पठित विषय के बारे में पढ़ो, कुछ वस्तुयें सावधानी के हाथ पढ़ो, अधिकांश वस्तुयें सरसरी तौर से पढ़ो, पढ़ने के बारे में मत सोचो और केवल पढ़ो। "
पठन शिक्षण का महत्त्व
(1) पठन शिक्षण से छात्रों का उच्चारण शुद्ध होता है।
(2) स्वाध्याय की आदत का विकास होता है।
(3) ज्ञान भण्डार में वृद्धि होती है।
(4) स्वत- अर्थग्रहण की क्षमता विकसित होती है।
(5) व्यक्तित्त्व का सर्वांगीण विकास होता है।
(6) अभिव्यक्ति सशक्त होती है।
(7) शब्द भण्डार में वृद्धि होती है।
(8) पठन योग्यता के साथ भाषा के अन्य कौशलों का विकास होता है, जैसे-लेखन. मौखिकाभिव्यक्ति, अर्थग्रहण आदि।
(9) अवकाश का सदुपयोग होता है।
(10) छात्र सजग रहता है।
(11) बालक के आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
(12) आदर्श पठन मनोरंजन का महत्त्वपूर्ण साधन है।
(13) आदर्श पठन से छात्रों के उच्चारण को शुद्ध और स्पष्ट बनाया जा सकता है।
(14) वाचन द्वारा मनुष्य जटिल से जटिल विषय पढ़कर समझ सकता है तथा पढ़े हुये अंश का सार खोलकर या लिखकर व्यक्त कर सकता है।
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