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बी एड - एम एड >> बीएड सेमेस्टर-2 हिन्दी शिक्षण बीएड सेमेस्टर-2 हिन्दी शिक्षणसरल प्रश्नोत्तर समूह
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बीएड सेमेस्टर-2 हिन्दी शिक्षण - सरल प्रश्नोत्तर
प्रश्न- मौन वाचन का महत्त्व बताइए |
उत्तर-
मौन वाचन का महत्त्व
मौन वाचन का महत्त्व निम्नलिखित हैं-
1. मौन वाचन द्वारा बालक शीघ्रता से पढ़ सकता है।
2. मौन वाचन में मस्तिष्क पर बहुत कम बल पड़ता है। अतः थकावट नहीं आती है। फलस्वरूप अधिक मात्रा में पढ़ सकता है। इसके विपरीत सस्वर वाचन थकावट उत्पन्न करने वाला होता है क्योंकि बालक के मस्तिष्क पर दबाव पड़ता है।
3. मौन वाचन का सबसे बड़ा लाभ यह है कि बालक पढ़ने के साथ-साथ विषय को आत्मसात् भी करते जाते हैं।
4. मौन वाचन का अभ्यास हो जाने पर छात्रों को गृह कार्य देने में सरलता हो जाती है।
5. स्वाध्याय की आदत मौन वाचन द्वारा डाली जा सकती है। बालकों में पुस्तक पढ़ने की रुचि उत्पन्न होती है और अवकाश में क्षणों का उपयोग पुस्तक पढ़कर करते हैं।
6. सार्वजनिक स्थानों तथा रेल में यात्रा करते हुये किसी अखबार या पत्रिका का सस्वर वाचन करने लगें तो आस-पास के वातावरण में एक प्रकार की अव्यवस्था उत्पन्न हो जाती है। ऐसे स्थानों पर मौन वाचन का ही सहारा लेना पड़ता है।
मौन वाचन के महत्त्व पर प्रकाश डालते समय ब्राइन (Brien ) लिखते हैं-"इसमें कोई सन्देह नहीं कि मौन वाचन की कम व्यवस्था है। साथ ही पद्धति हमारे जीवन की क्रियाओं के लिए भी सबसे उत्तम कही जा सकती है क्योंकि हमारा अधिकांश वाचन मौन रूप में होता है।"
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