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बी एड - एम एड >> बीएड सेमेस्टर-2 हिन्दी शिक्षण बीएड सेमेस्टर-2 हिन्दी शिक्षणसरल प्रश्नोत्तर समूह
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बीएड सेमेस्टर-2 हिन्दी शिक्षण - सरल प्रश्नोत्तर
प्रश्न- उच्चारण का महत्व बताइये।
अथवा
हिन्दी शिक्षण में उच्चारण के महत्व पर प्रकाश डालिए।
उत्तर-
उच्चारण का महत्व
हिन्दी भाषा एक समृद्ध भाषा है, इसका अपना विशिष्ट ध्वनि विज्ञान है। हिन्दी भाषा का ध्वनि विज्ञान वैज्ञानिक है। इसमें एक वर्ण की अपनी ध्वनि है। इसी तरह संयुक्त अक्षरों के उच्चारणों के नियम हैं, जिनके सम्यक ज्ञान से सही उच्चारण का ज्ञान कराया जा सकता है। इस कारण हिन्दी भाषा - शिक्षण में उच्चारण पर विशेष बल दिया जाता है। इससे हिन्दी भाषा में न केवल शुद्धता, स्पष्टता एवं सार्थकता आती है वरन् अर्थ का अनर्थ नहीं हो सकता है जैसे-
"यद्यपि बहुनाधीषे व्याकरणं पठ तथापि हे पुत्र!
स्वजनः श्वजनो मा भूतं सकलं शकलं सकृच्छकृत।।"
इसका अर्थ यह है है पुत्र!यद्यपि तुमने बहुत अध्ययन कर लिया है तथापि अब व्याकरण पढ़ो, जिससे स्वजन (आत्मीयजन) के स्थान पर श्वजन (कुत्ता), सकल (सम्पूर्ण) के स्थान पर शकृत न हो जाये।
उपरोक्त श्लोक में शुद्ध उच्चारण की महत्ता पर बल दिया गया है। यह छात्रों को सही दिशा-निर्देश दे सकता है क्योंकि अधिकांश छात्र 'स' और 'श' के उच्चारण में कोई विभेद नहीं करते हैं। ऐसे ही और भी अनेक शब्द हैं, जिनके अशुद्ध उच्चारण से अर्थ का अनर्थ हो जाता है। इसलिये विद्यार्थियों में उच्चारण की शिक्षा दी जानी आवश्यक है।
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