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बी एड - एम एड >> बीएड सेमेस्टर-2 हिन्दी शिक्षण बीएड सेमेस्टर-2 हिन्दी शिक्षणसरल प्रश्नोत्तर समूह
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बीएड सेमेस्टर-2 हिन्दी शिक्षण - सरल प्रश्नोत्तर
प्रश्न- लिखित भाषा के आवश्यक प्रमुख अंग क्या-क्या हैं?
उत्तर-
लिखित भाषा के तत्त्व या अंगों को दो भागों में विभाजित करके स्पष्ट किया जा सकता है-
1. मौलिक तत्त्व या अंग,
2. अभौतिक तत्त्व या अंग।
भौतिक तत्त्व या अंग के अन्तर्गत कागज, कलम, दवात, स्याही, श्यामपट्ट, पेन्सिल, रबर, स्लेट इत्यादि आते हैं जबकि अभौतिक तत्त्व या अंग निम्नलिखित हैं-
(i) पठित सामग्री - लिखित कार्य करने से पूर्व पठित सामग्री का होना आवश्यक है। अतः लेखन के लिए किसी-न-किसी पठित सामग्री वाक्यों के आधार पर या सांकेतिक आधार पर ही आवश्यक है।
(ii) लिपि - लिपि के बिना लेखन कार्य असम्भव है। लिपि लेखन कला की एक प्रणाली है जो प्रत्येक समाज, देशकाल, परिस्थिति के अनुसार- विकसित, संशोधित एवं परिवर्तित करता रहता है।
(iii) वर्णमाला, शब्द एवं वाक्य - किसी भी लिपि का आधार उसकी वर्णमाला अर्थात् अक्षर समूह होता है। अक्षरों से शब्दों का तथा शब्दों से वाक्यों का निर्माण होता है। यही वाक्य जब किसी विषय, या भाव को व्यक्त करते हैं तो वह उसकी भाषा कहलाती है।
(iv) भाषा-शैली - लेखन कार्य में भाषा-शैली का विशेष महत्त्व होता है। भाषा के माध्यम से हम लिखित या मौखिक रूप से अपने विचारों की अभिव्यक्ति करते हैं और जब इसको भावात्मक, विचारात्मक, गन्वेषणात्मक, आलोचनात्मक, हास्य या व्यंगात्मक तथा वर्णनात्मक तरीके से व्यक्त किया जाता है तो यह उस भाषा की शैली कहलाती है।
(v) रस, छन्द तथा अलंकार - रस, छन्दः तथा अलंकार किसी साहित्य के सौन्दर्य के आवश्यक अंग हैं। इसके बिना पद्य या गद्य में आनन्दानुभूति नहीं की जा सकती है।
(vi) मुहावरे तथा लोकोक्तियाँ - मुहावरे तथा लोकोक्तियाँ किसी भाषा के भाव को व्यक्त करने के लिए महत्त्वपूर्ण होते हैं। गद्य लेखन में मुहावरों तथा लोकोक्तियों का विशेष महत्त्व होता है इससे विषय की रोचकता बढ़ जाती है।
(vii) साहित्यिक विधाएँ - साहित्य लेखन की विधा के रूप में गद्य, पद्य, कविता, कहानी, आलोचना, संस्मरण, जीवनी, आत्मकथा, पत्र शोध प्रतिवेदन इत्यादि विधाएँ प्रचलित हैं जो उस भाषा साहित्य की विशिष्ट पहचान होती है।
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