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बीएड सेमेस्टर-2 हिन्दी शिक्षण

सरल प्रश्नोत्तर समूह

प्रकाशक : सरल प्रश्नोत्तर सीरीज प्रकाशित वर्ष : 2023
पृष्ठ :180
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 2760
आईएसबीएन :0

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बीएड सेमेस्टर-2 हिन्दी शिक्षण - सरल प्रश्नोत्तर

प्रश्न- अशुद्ध वर्तनी के प्रकार बताइए।

उत्तर-

अशुद्ध वर्तनी के प्रकार

किसी शब्द से अक्षरों को लिखने अथवा चयनित करने की प्रक्रिया को वर्तनी कहते हैं। मौखिक भाषा में हम शब्दों का उच्चारण वर्तनी के आधार पर ही करते हैं। बोलने में यदि उच्चारण कुछ अशुद्ध भी हो जाता है तो भावों के सम्प्रेषण की प्रक्रिया में विशेषता नहीं आती किन्तु लेखन में वर्तनी की छोटी-सी त्रुटि भी अर्थ का अनर्थ कर देती है। अशुद्ध वर्तनी के निम्नलिखित प्रकार हैं-

1. अक्षरों से सम्बन्धित अशुद्धियाँ - हिन्दी भाषा में कुछ अक्षरों या शब्दों के उच्चारण ध्वनियों में बहुत कम अन्तर होने के कारण छात्र प्रायः भ्रमवश गलत अक्षरों का प्रयोग कर देते हैं; जैसे- विशेष को विशेष या विषेश। गणेश को गड़ेश। वीणा की बीणा इत्यादि।

2. भाषा सम्बन्धी अशुद्धियाँ - भाषा लेखन के दौरान छात्र प्रायः मात्राओं की गलतियाँ कर देते हैं जिससे भाषा अशुद्ध या गलत हो जाती है; जैसे- मैंने को मेने। कवि को कबी, ऋतु को रितु। दूर को दुर आदि।

3. र तथा सम्बन्धी अशुद्धियाँ - प्राय- छात्रा तथा स्नातक परास्नातक उत्तीर्ण उच्च शिक्षार्थियों के द्वारा भी इस प्रकार की वर्तनी दोष पाए जाते हैं; जैसे- आशीर्वाद को आर्शीवाद। पर्यावरण को परयावरण, आदि।

4. संयुक्ताक्षरों से सम्बन्धित अशुद्धियाँ - संयुक्तक्षरों की वर्तनी दोष तो कभी-कभी शिक्षक तक को हँसी का पात्र बना देती है; जैसे- कक्षा को कच्छा कहना, छात्र को क्षात्र कहना तथा इच्छा को इक्षा इत्यादि।

5. अनुस्वार तथा अनुनासिक से सम्बन्धित अशुद्धियाँ - अनुस्वार तथा अनुनासिक की अशुद्धियाँ प्रायः पायी जाती हैं। अनुनासिक का सीधा नियम है कि जिस अक्षर के पूर्व अनुनासिक उच्चारित होता है; उस अक्षर वर्ण का अन्तिम अक्षर का आधा अक्षर उस अनुनासिक उच्चारित स्थान पर लिखा जाता है। जैसे - चन्दन ना कि चन्दन, चम्पक न कि चंपक इत्यादि।

6. ध्वनि लोप या अतिरिक्त ध्वनि सम्बन्धी अशुद्धियाँ - इस प्रकार की निम्नलिखित अशुद्धियाँ पायी जाती हैं; जैसे - कर्त्ता के स्थान पर कर्ता लिखना, नैया के स्थान पर नैय्या लिखना इत्यादि।

उक्त अशुद्धियों के अतिरिक्त कुछ और वर्तनी अशुद्धियों; जैसे-प्रशंसा को प्रसंशा या प्रशंशा या प्रदर्शनी को प्रदर्शिनी, आविष्कारकों आविस्कार, अपेक्षित को आपेक्षित इत्यादि पायी जाती हैं।

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