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बी एड - एम एड >> बीएड सेमेस्टर-2 हिन्दी शिक्षण बीएड सेमेस्टर-2 हिन्दी शिक्षणसरल प्रश्नोत्तर समूह
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बीएड सेमेस्टर-2 हिन्दी शिक्षण - सरल प्रश्नोत्तर
प्रश्न- दूरदर्शन व चलचित्रों का एक दृश्य-श्रव्य सहायक सामग्री के शिक्षण में प्रयोग के सोपानों का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
कक्षा-शिक्षण में दूरदर्शन तथा चलचित्रों का प्रयोग
कक्षा-शिक्षण में इस दृश्य-श्रव्य सहायक सामग्री का प्रयोग किया जाने लगा है तथा भारतवर्ष में भी इनकी प्रभावशीलता के मूल्यांकन के लिए शोध कार्य किए गए हैं। यह सहायक सामग्री सबसे अधिक प्रभावशाली सिद्ध हुई है। कक्षा शिक्षण में इनके प्रयोग के लिए छ- सोपानों का अनुसरण किया जाता है। इन सोपानों का विवरण यहाँ पर दिया गया है-
प्रथम सोपान - इकाई योजना बनाते समय यह निश्चय कर लिया जाता है कि कौन-सा प्रकरण किस स्थिति में तथा किस समय पर छात्रों को दिखलाया जाए। चलचित्र की उपलब्धि को भी ध्यान में रखना होता है। प्रत्येक राज्य में शिक्षा विभाग के अन्तर्गत श्रव्य-दृश्य शिक्षण विभाग होता है, जो अपने यहाँ उपलब्ध चलचित्रों के सम्बन्ध में सूची पत्र प्रकाशित करता है। ये सूत्री - पत्र विद्यालयों के पुस्तकालय से प्राप्त किए जा सकते हैं। अतः चलचित्रों को प्राप्त करना पहला चरण है।
द्वितीय सोपान - चलचित्रों का कक्षा में उपयोग करने से पूर्व शिक्षक को स्वयं चलचित्रों को दो-तीन बार देखना होता है और बिन्दुओं को ध्यान में स्थिर करना होता है, जिनको प्रस्तावना के रूप में प्रस्तुत करना ही यह दूसरा चरण हुआ।
तृतीय सोपान - चलचित्र दिखाने से पूर्व चलचित्रों की प्रस्तावना के रूप में शिक्षार्थियों को निम्नांकित बिन्दुओं की दृष्टि से स्पष्टता होनी चाहिए-
1. चलचित्र के माध्यम से मूलतः क्या दिखाया जाने वाला है?
2. चलचित्र देखते समय किन बिन्दुओं को ध्यानपूर्वक देखना है?
शिक्षार्थियों को उक्त बिन्दुओं की दृष्टि से उत्प्रेरित करने के लिए शिक्षक स्वयं चलचित्र के सम्बन्ध में विवरण प्रस्तुत कर सकता है अथवा प्रश्नोत्तर का सहारा ले सकता है। इस चरण का मूल प्रयोजन यह है कि चलचित्र देखने से पूर्व विद्यार्थियों को यह ज्ञान होना चाहिए कि वे क्या देखने वाले हैं।
चतुर्थ सोपान - इस सोपान में शिक्षक यह ज्ञात करता है कि चलचित्र शिक्षार्थियों को विषय-वस्तु का ज्ञान करने में किस सीमा तक प्रभावी हुआ है। वह प्रश्नों का प्रयोग करता है, विचार-विमर्श आयोजित करता है तथा शिक्षार्थियों को चलचित्र के सम्बन्ध में अस्पष्ट बिन्दुओं पर प्रश्न पूछने के लिए निमन्त्रण करता है।
पंचम सोपान - इस सोपान में शिक्षार्थियों को चलचित्र से सम्बन्धित विषयों पर अन्य पुस्तकों तथा पत्रिकाओं की सूची दी जा सकती है और शिक्षार्थी अर्जित अनुभवों का प्रबलीकरण कर सकते हैं।
षष्टम सोपान - इस सोपान में शिक्षक स्वयं चलचित्र की प्रभावोत्पादकता का मूल्यांकन करता है तथा भविष्य में चलचित्र और अधिक प्रभावोत्पादक ढंग से उपयोग करने के लिए मूल्यांकन सुझाव अपनी पत्रिका में अथवा चलचित्र के साथ आने वाले निर्धारित प्रारूप में अंकित करता है।
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